Thu. Apr 18th, 2024

हिन्दू धरम संप्रदाय का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि को माना जाता है …कहते हैं इसी दिन लंबी तपस्या के बल पर मां पार्वती ने शिव को अपने पति के रुप में वरण किया …शिव और शक्ति के मिलन के इस महापर्व को आप कैसे मनायें …कैसे भोलेनाथ की पूजा करें कि आपकी हर मनोकामना पूरी हो। … शिव और शक्ति का मिलन ….मिलन का महापर्व यानि महाशिवरात्रि … कहते हैं इसी दिन भगवान शिव ने वैराग्य जीवन छोड़कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया ….धर्म ग्रंथों और शिवपुराण की माने तो एक लंबी कठिन तपस्या के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रुप में प्राप्त किया …माता पार्वती और भगवान शिव की शादी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुयी …शिवभक्त सृष्टि के निर्माता पालनकर्ता और संहारकर्ता भोलेनाथ के विवाह को भक्ति भावना से मनाते हैं …रातभर जाग कर भोलेनाथ और मां पार्वती के सात फेरों का गवाह बनते हैं …अगर इस दिन की वैज्ञानिक महत्ता को देखा जाये तो ज्योतिष शास्त्र में ये बताया जाता है कि महाशिव की रात में पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध में इस अवस्था में रहता है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा का एक अद्भूत प्रवाह प्राकृतिक रुप से होता है …जिसे भौतिक और आध्यात्मिक दोनों रुप में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है …महाशिव रात्रि का दिन शिव के उपासक ये कहते हैं कि ये दिन प्राकृतिक रुप से मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर तक जाने का रास्ता खोलने में मदद करता है ..महाशिवरात्रि का पावन पर्व फाल्गुन के महीने में उत्तर भारतीय हिन्दू कैलेंडर के अनुसार और माघ में दक्षिण भारतीय कैलेंडर के अनुसार पड़ता है …रात की तिमिर अंधियारी को देखकर ये भी कहा जाता है कि ये महाशिवरात्रि का त्योहार गंभीरता के साथ जीवन और दुनिया में अंधेरे में अज्ञानता पर काबू पाने का दिवस है ….. जीवन में तो महाशिव रात्रि भोलनाथ के विवाह का उत्सव मात्र ही हैं …जिसमें जगह जगह भक्त शिव बारात निकालते हैं …विधि विधान से विवाहोत्सव का आयोजन किया जाता है ….ज्ञानी बताते हैं कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्तों को आत्मशुद्धि का मौका मिलता है …बुजुर्ग इस नरक मुक्ति का मार्ग मानते हैं तो वहीं युवतियां अपने लिये योग्य वर के लिये भोलेनाथ से आशिर्वाद का मौका मानती हैं ..शादी शुदा महिलायें अपने पति के दीर्घायु जीवने और घर में खुशहाली सुख शांति के लिये महाशिवरात्रि का व्रत धारण करती है …इस दिन शिवालय में जाकर शिवलिंग पर विशेष जलाभिषेक से मनचाही मन्नतें पूरी होने की बात भी कही जाती है …इस मौके पर कुछ भक्त शिवलिंग पर रुद्राभिषेक भी अर्पित करते हैं …कहा जाता है कि भोलेनाथ को भांग धतूरा ..दुग्ध ..दही..शहद जैसे पंचामृत से जलाभिषेक पुण्यकारी होता है लेकिन गलती से भी शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते ..हल्दी और चंपा केतकी के फूल का पूजन में प्रयोग नहीं करना चाहिये …वरना भगवान शिव के प्रकोप का भाजी बनना पड़ता है. कहते हैं शिवरात्रि के दिन जो व्यक्ति बिल्व पत्तियों से शिव जी की पूजा करता है और रात के समय जागकर भगवान के मंत्रों का जाप करता है, उसे भगवान शिव आनन्द और मोक्ष प्रदान करते हैं…धर्माचार्यों की माने तो भोलेनाथ पर चढाया जाने वाले पानी दूध शहद बेल के पत्ते आत्मा की शुद्धि का प्रतीक है …सिंदूर का पेस्ट पुण्य का प्रतीक माना जाता है जबकि चढ़ाये जाने वाले फल दीर्घायु जीवन की इच्छा को दर्शाता है …पान के पत्ते को सांसारिक सुखों की इच्छा का प्रतीक माना जाता है …हमारे पड़ोसी मुल्क हिन्दू राष्ट्र नेपाल का तो महाशिवरात्रि राष्ट्रीय पर्व माना जाता है …नेपाल में भी इस दिन शिवभक्ति की पराकाष्ठा देखने को मिलती है …महाशिवरात्रि भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद खास है। इस शुभ दिन पर भोलेनाथ की पूजा का विधान है, जो जातक इस दिन का उपवास रखते हैं और भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती की पूजा करते हैं उनका वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।

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