Thu. Feb 22nd, 2024

हिन्दू धर्म में जीवन से लेकर मौत तक होने वाले तमाम संस्कारों में तुलसी का महत्व किसी से छुपा नही है …यहां तक कि तुलसी को माता लक्ष्मी का रुप माना जाता है …विष्णु को अतिप्रिय तुलसी के बारे में कहा जाता है कि किसी भी प्रकार का भोग नारायण तब तक स्वीकार नहीं करते जब तक उसमें तुलसी का इस्तेमाल न हो …लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि विष्णु को अतिप्रिय तुलसी से भगवान शिव को नफरत क्यू है …शिव के पुत्र गणेश की पूजन में भी तुलसी का इस्तेमाल नरक कारक होता है … कहते हैं पूर्व जन्म में तुलसी का नाम वृंदा था …जो असुर जालंधर की पत्नी थी …असुर जालंधर अत्यंत हीं अत्याचारी दानव था ..जो देवताओं पर काफी जुल्म करता था …असुर जालंधर को सबक सीखाने का आग्रह भोलेनाथ ने विष्णु से किया ..तब विष्णु ने छल से वृंदा का पतिव्रता भंग को कर दिया …जब इस बात की जानकारी पतिव्रता वृंदा को पता चली तो उसने भगवान विष्णु को श्राप देकर पत्थर का बना दिया …वृंदा की इस हरकत से विष्णु इतने नाराज हुये कि उन्होने वृंदा को लकड़ी का बनने का श्राप दे दिया …

आखिर नारायण पूजा में इस्तेमाल होने वाला तुलसी पत्ता शिवपूजन में इस्तेमाल क्यू नहीं किया जाता है ….

हिन्दू किवदंतियों में ये माना जाता है कि तभी से वृंदा तुलसी के रुप में पौधा बन गयी …कहा जाता है कि शापित होने की वजह से हीं भगवान शिव को तुलसी नहीं चढ़ायी जाती …बल्कि उसके बदले बेलपत्र का इस्तेमाल शिव उपासना में किया जाता है …कहा तो ये भी जाता है कि तुलसी भगवान श्रीहरि की पटरानी हैं और तुलसी ने अपनी तपस्या से हीं श्रीहरि को पतिरुप मे प्राप्त किया था …इसलिये भी तुलसी भोलेनाथ पर नहीं चढ़ायी जाती है …जबकि शिवपूत्र गणदेवा के लिये कहा जाता है कि …माता तुलसी अपने विवाह की कामना को लेकर तीर्थ स्थलों का भ्रमण करते हुये …गंगा के उस तीर पर पहुंची जहां गणेश तपस्या में लीन थे …गणेश के सौंदर्य पर मोहित तुलसी ने गणेशजी की तपस्या भंग कर दी ..और गणदेवा से अपने विवाह की इच्छा जाहिर की …तपस्या भंग होने से नाराज गणेश ने तुलसी को श्राप दिया कि तुम्हारा विवाह असुरों से होगा …कहते हैं इस श्राप की वजह से हीं तुलसी असुरराज शंखचूर्ण से हुयी …जिसका वध भोलेनाथ ने किया …इस श्राप से विचलित तुलसी ने गणेशजी से अपनी गलती की माफी मांगी …तब गणेश जी ने क्षमादान देते हुये ये आशिर्वाद माता तुलसी को दिया कि सतयुग में भगवाना विष्णु और कृष्ण की प्रिय बनोगी …और कलयुग में भी तुलसी लोगो के लिये जीवन और मोक्षदायी बनेगी …लेकिन गणेश ने इस बात की घोषणा भी की कि ..मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना सदैव अशुभ माना जायेगा …
उम्मीद है आपको हमारा प्रोग्राम अच्छा लगा हो … आप भी ध्यान रखियेगा कि कभी भी शिव और गणेश उपासना में तुलसीदल का इस्तेमाल न करें वरना ये अहितकारी होगा

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