S -400 मिसाइल सिस्टम सौदे मे भारत को प्रतिबंधों से बचाने के लिए अमेरिकी सांसदों ने कही बड़ी बात, जाने क्या उठाया कदम

S -400 मिसाइल सिस्टम सौदे मे भारत को प्रतिबंधों से बचाने के लिए अमेरिकी सांसदों ने कही बड़ी बात, जाने क्या उठाया कदम

देशों के पारस्परिक संबंध की बात करे तो रूस भारत का पारंपरिक सहयोगी रहा हैं। सोवियत संघ के ज़माने से ही भारत और रूस में भरोसे का रिश्ता रहा है। दूसरी ओर अमेरिका और भारत में पिछले 15 सालों में सुरक्षा साझेदारी बढ़ी है। रूस और अमेरिका की स्पर्धा भी सोवियत के समय से ही है।

कुछ समय से भारत और रूस के बीच S -400 मिसाइल सिस्टम सौदे को लेकर अमेरिका का पक्ष लगातार चर्चा में बना हुआ है। ये आशंका जताई जा रही थी कि रूस के साथ S -400 मिसाइल का सौदा करने के चलते अमेरिका भारत पर प्रतिबंध लगा सकता है। हालांकि अमेरिकी राजनीति में कई लोग इस मामले मे भारत का लगातार समर्थन कर रहे हैं।

इस सौदे के मामले को लेकर डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन सीनेटर मार्क वार्नर और जॉन कॉर्निन ने कहा था कि ‘काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस’ (सीएएटीएसए), जिसके तहत भारत पर प्रस्तावित प्रतिबंधों को लेकर विचार किया जा रहा है, उससे भारत को छूट मिलनी चाहिए। अब भारत के पक्ष में तीन और अमेरिकी सांसदों ने एक संशोधन पेश किया है।

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आपको बता दे की ‘राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम 2022’ में रिपब्लिक के तीन सीनेटरों ने एक संशोधन पेश किया है। इस संशोधन का मकसद है कि रूसी हथियार खरीदने वाले क्वॉड देशों को थोड़ी रियायत मिले और उन पर प्रतिबंध आसानी से ना लगाया जा सके. क्वॉड देशों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका है। अमेरिका ने ये कदम तब उठाया है जब भारत को मॉस्को से S -400 मिसाइल अगले एक महीने में मिलने की उम्मीद है।

मीडिया से बात करते हुए एक रिपब्लिकन सीनेट ने कहा की अमेरिकी सांसदों ने चीन के साथ भारत की सुरक्षा स्थिति को मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि भारत क्वॉड देशों के केंद्र में है जो चीन का मुकाबला करने के लिए आपस में सहयोग कर रहे हैं। भारत एकमात्र ऐसा क्वॉड देश है जो चीन के साथ बॉर्डर साझा करता है, वो एकमात्र सदस्य जिसने चीन के साथ युद्ध में अपने सैनिकों को खोया है।

इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वे भारत के रक्षा हथियारों की खरीद में भी बदलाव देखना चाहते हैं। उन्होंने बताया की साल 2033-34 तक भी अगर भारत रूस के साथ जा रहा है और क्वॉड के साथ संबंधों को गहरा करने पर खास फोकस नहीं कर रहा है तो मुझे लगता है कि ये एक अलग मुद्दा हो सकता है। इसलिए मेरे हिसाब से समय के साथ-साथ कदम उठाए जाने चाहिए।

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बता दें कि इससे पहले रूस से S -400 मिसाइल सिस्टम खरीदने की वजह से अमेरिका ने नैटो के सदस्य देश तुर्की पर प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे मे इस बात की आशंका जताई जाती रही है कि रूस से सौदे को लेकर अमेरिका भारत पर भी इस तरह के प्रतिबंध लगा सकता है।

ऐसे में भारत के सामने धर्मसंकट की स्थिति पैदा होती है कि वो किसके साथ कितना रिश्ता रखे. लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसका कोई पैमाना नहीं होता है।