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रविवार, अक्टूबर 17, 2021

राजस्थान में अब बाल विवाह का भी होगा रजिस्ट्रेशन, विधानसभा में मचा हंगामा

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राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2021 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया हैं। इसमें बाल विवाह को रजिस्टर्ड करने का प्रावधान रखा गया है। अब राज्य में बाल विवाह के पंजीकरण की भी अनुमति मिल जाएगी। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने इस विधेयक को सदन में रखते हुएकहा गया हैं कि अगर शादी के समय लड़के की उम्र 21 साल से कम और लड़की की उम्र 18 साल से कम है, तो माता-पिता या अभिभावकों को 30 दिनों के भीतर इसकी जानकारी देनी होगी और पंजीकरण अधिकारी के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

इस विवादित विधेयक का विधानसभा में काफी हंगामा हुआ। भाजपा ने गहलोत सरकार पर बाल विवाह को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। BJP ने विधानसभा में इस विधेयक पर मत विभाजन की मांग की और सरकार जब नहीं मानी तो सदन से वॉकआउट कर दिया।

संसद की कार्यवाही के दौरान विधानसभा में मुख्य विपक्ष दल भाजपा ने सवाल उठाते हुए पूछा, “पंजीकरण की क्या आवश्यकता है और बिल का उद्देश्य क्या है। भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या विधानसभा हमें सर्वसम्मति से बाल विवाह की अनुमति देती है? यह विधेयक विधानसभा के इतिहास में काला अध्याय लिखेगा।” 

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नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि, राजस्थान में बाल विवाह अधिनियम 2006 के तहत ऐसे विवाह गैर कानूनी ही रहेंगे। जैसे हीं वे रजिस्ट्रेशन कराएंगे, कलेक्टर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। BJP के उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि अजमेर के रहने वाले शारदा जी के बनाए गए 1927 के कानून शारदा एक्ट के तहत बाल विवाह गैरकानूनी है और उसी राजस्थान में हम उसको कानूनी मान्यता दे रहे हैं।

वहीं राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि इस विधेयक का मकसद हर विवाहित को पंजीयन कराना होगा। उन्होंने कहा कि संशोधन कही नहीं कहता कि ऐसे विवाह वैध होंगे। कलेक्टर या डीएम चाहे तो उनपर कार्रवाई कर सकते हैं। यह विधेयक केंद्रीय कानून का विरोधाभास नहीं है। विवाह प्रमाण पत्र एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके अभाव में विधवा को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। 

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