25 C
Lucknow
शुक्रवार, सितम्बर 17, 2021

महर्षि व्यास ने की थी जहां पुराणों की रचना,उस तीर्थ स्थान पर किन्नरों का क्या है महत्व जानिए आगे-

Must read

Hardoi: नानी के घर आई 6 साल की मासूम का पड़ोसी ने किया रेप, जाने पूरा मामला…

हरदोई(Hardoi) जिला के संडीला से एक मासूम के साथ दुष्कर्म का घिनौना मामला सामने आया हैं। मंगलवार रात मासूम बच्ची घर के...

Uttarakhand: देर रात भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट के घर पर हुआ धमाका

उत्तराखंड(Uttarakhand) में भाजपा जिलाध्यक्ष नैनीताल प्रदीप बिष्ट के घर पर मंगलवार देर रात करीब 12:30 बजे धमाका होने से हड़कंप मच गया...

देश में सिंगल डोज़ वैक्सीन Sputnik Light की तीसरे ट्रायल को मंज़ूरी

देश में कोरोना बीते दो साल से तबाही मचा रहा हैं और भारत में इससे अछूता नहीं हैं। हालांकि अब जा कर...

IPL: स्टेडियम में मिलेगी दर्शकों को एंट्री, इस दिन से बुक करे टिकट

BCCI ने बुधवार को IPL से जड़ी दर्शकों के लिए एक बड़ी घोषणा की हैं। बोर्ड ने टूर्नामेंट के 14वें सीज़न के...

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के करीब सीतापुर में स्थित ऐतिहासिक पवित्र तीर्थ स्थल नैमिषारण्य दुनिया भर में प्रसिद्ध है.इसे नीमसार के नाम से भी जाना जाता है.ऐसा माना जाता है कि सारे तीर्थों की यात्रा करने के बाद यदि इस तीर्थ स्थान की यात्रा न की गई तो आपकी सभी जगह की धार्मिक यात्राएं अपूर्ण मानी जाती है.नीमसार धाम का वर्णन पुराणों में भी पाया जाता है.नीमसार धाम सीतापुर के एक गांव में है.इसको लेकर बहुत प्राचीन मान्यता है कि पुराणों की रचना महर्षि व्यास ने इसी स्थान पर की थी.नीमसार ही ऐसी जगह है जहां पहली बार सत्यनारायण की कथा हुई थी.

My Bharat News - Article 112 2
ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है नैमिषारण्य स्थल को

आपको बतायें कि नैमिषारण्य के इस नाम के पीछे भी मान्यता है कि ये नाम नैमिष नामक वन की वजह से रखा गया है.इसके पीछे की कहानी है कि महाभारत के युद्ध के के बाद साधु संत जो कलियुग के प्रारंभ के विषय में अत्यंत चिंतित थे,वे ब्रम्हा जी के पास पहुंचे.चिंतित साधु-संतों ने ब्रम्हा जी से किसी ऐसे स्थान के बारे में बताने को कहा जो कलियुग के प्रभाव से अछूता रहे.ब्रम्हा जी ने एक पवित्र चक्र निकाला और उसे पृथ्वी की तरफ घुमाते हुए बोले कि जहां भी ये चक्र रूकेगा,वहीं वो स्थान होगा जो कलियुग के प्रभाव से मुक्त रहेगा.चिंतित संत इस चक्र के पीछे-पीछे आए जो कि नैमिष वन में आकर रूका.इसीलिए साधु-संतो ने इसी स्थान को अपनी तपोभूमि बना लिया.जिसके बारे में ब्रम्हा जी ने स्वयं इस स्थान को ध्यान योग के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान बताया था.

My Bharat News - Article 667
पवित्र पुस्तक रामायण में भी मिलता है इस धार्मिक स्थान का उल्लेख

हिन्दू धर्म की पवित्र पुस्तक रामायण में भी उल्लेख मिलता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीराम ने अश्र्वमेघ यज्ञ पूरा किया था और महर्षि वाल्मीकि,लव कुश भी उन्हें यहीं मिले थे.महाभारत काल में यहां पर युधिष्ठिर और अर्जुन भी आये थे.नैमिषारण्य के बारे में आपको बतायें तो ये एक गोलाकार पवित्र सरोवर है.लोग इसमें स्नान कर परिक्रमा करते हैं.आप इसमें जैसे ही उतरते हैं तो इसका अद्भुत जलप्रवाह आपको अपने आप परिक्रमा कराता है.जिसके बाद आपको लगेगा इस पवित्र चक्र का एक और चक्कर लगाया जाए.इसमें चक्रमुना गोल घेरा है,जिसके अन्दर और बाहर जल है.हालांकि इस चक्र में स्नान करना मनाही है आपको स्नान चक्र के बाहर ही करना होगा.

My Bharat News - Article 56 5
सदियों से लगता आ रहा है यहां मेला

नैमिषारण्य तीर्थ स्थान पर सदियों से मेला लगता चला आ रहा है.यहां पर तरह-तरह के हठी, योगी, संत-महंत और श्रद्धालुओं,दानवीरों का सम्मिलन के साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार का गुजायमान नियमित होता रहता है.यहां पर पर्यटन के चलते एक शताब्दी पूर्व गुजराती ब्राह्मण व किन्नर दिलबहार का आना हुआ था.जिसकी जजमानी चलती थी.

My Bharat News - Article 90 6
पहली बार सत्यनारायण की कथा कही गई थी यहां पर

दिल बहार किन्नर चक्रतीर्थ के आसपास ही रहता और हर अमावस्या तथा दशमी को वो स्थानीय नागरिकों से जनसहयोग मांगता था.84 कोसीय परिक्रमा मेले में मांग-मांग कर व जनसहयोग से उसने चक्रतीर्थ के दाहिने ओर एक कमरेनुमे मठिया और एक विशालकाय कुएं का निर्माण कराया.दिल बहार किन्नर की मृत्यु के बाद गनी किन्नर ने किन्नरों की जजमानी कायम रखी, बाद में इस चौखट पर बदाला किन्नर ने अपना स्थान बनाया.बदाला ने अपने जीते जी सफेदा व गुलशन किन्नरों के माध्यम से अपनी जजमानी बनाए रखी और अपने साम्राज्य को भी बढ़ाया.गुलशन किन्नर जिसे बाद में इटौंजा, लखनऊ क्षेत्र की व सफेदा किन्नर को बाड़ी, नैमिषरण्य की जजमानी दी गई.

My Bharat News - Article 665
इस पवित्र स्थल पर किन्नरों का भी रहा है काफी ज्यादा महत्व

बाड़ी की जजमानी क्षेत्र में 84 कोसी परिक्रमा मेला का सम्पूर्ण क्षेत्र था.इसी दौरान सफेदा किन्नर की अज्ञात अराजक तत्वों द्वारा हत्या कर दी गई.बदाला किन्नर की चेली काजल किन्नर ने अपने बुजुर्गों के नाम निशान ढूंढ़कर आदि गुरू मां दिल बहार किन्नर के द्वारा स्थापित मठिये व कुएं का जीर्णोद्धार कराया व अर्द्धनारीश्वर मंदिर की स्थापना की.नैमिष क्षेत्र में सदियों से किन्नरों की गद्दी कायम रही है.अब इस गद्दी पर काजल किन्नर सक्रिय होकर मांग-मांग कर व जनसहयोग लेकर अपने बुजुर्गों की स्मृतियों को सहेजने का काम कर रही है.हर साल बसंत पंचमी के अवसर पर यहां भण्डारे का आयोजन किया जाता है.जिसमें किन्नर और गैर किन्नरों की भी बड़ी संख्या जुटती है.

My Bharat News - Article 88
सदियों से कायम रही है यहां किन्नर समाज की गद्दी
- विज्ञापन -

More articles

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

- विज्ञापन -

Latest article

Hardoi: नानी के घर आई 6 साल की मासूम का पड़ोसी ने किया रेप, जाने पूरा मामला…

हरदोई(Hardoi) जिला के संडीला से एक मासूम के साथ दुष्कर्म का घिनौना मामला सामने आया हैं। मंगलवार रात मासूम बच्ची घर के...

Uttarakhand: देर रात भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट के घर पर हुआ धमाका

उत्तराखंड(Uttarakhand) में भाजपा जिलाध्यक्ष नैनीताल प्रदीप बिष्ट के घर पर मंगलवार देर रात करीब 12:30 बजे धमाका होने से हड़कंप मच गया...

देश में सिंगल डोज़ वैक्सीन Sputnik Light की तीसरे ट्रायल को मंज़ूरी

देश में कोरोना बीते दो साल से तबाही मचा रहा हैं और भारत में इससे अछूता नहीं हैं। हालांकि अब जा कर...

IPL: स्टेडियम में मिलेगी दर्शकों को एंट्री, इस दिन से बुक करे टिकट

BCCI ने बुधवार को IPL से जड़ी दर्शकों के लिए एक बड़ी घोषणा की हैं। बोर्ड ने टूर्नामेंट के 14वें सीज़न के...

राकेश टिकैत ने BJP और AIMIM पर साधा निशाना, बोले AIMIM पार्टी बीजेपी की ‘बी’ पार्टी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर नेताओं में ज़ुबानी जंग जारी हैं। ऐसे में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश...