जानिए किन-किन एहतियात को बरतते हुए बच सकते हैं आप ब्लैक फंगस जैसी खतरनाक बीमारी से

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ब्लैक फंगस से बचने के लिए बरतें कुछ एहतियात

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच ब्लैक फंगस,व्हाइट फंगस और यलो फंगस के मामले सामने आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर इस तरह के फंगस को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही हैं. जबकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जितना इन्हें खतरनाक बताया जा रहा है ऐसा नहीं है. सतर्कता बरतने से इन फंगस से लड़ा जा सकता है.

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सतर्कता बरतते हुए बचा जा सकता है ब्लैक फंगस से

ब्लैक फंगस कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में ज्यादा देखा जा रहा है, आइए जानते हैं कि इन फंगस को लेकर चल रहे भ्रम से हम और आप कैसे बच सकते हैं.

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ब्लैक फंगस इंसान के शरीर में नाक के जरिये करता है प्रवेश

ये फंगस नाक के जरिये शरीर में प्रवेश करता है,जो कि वहां पहुंचकर ये रक्तवाहिनी को बंद कर देता है. इससे उस क्षेत्र की रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है और नाक में भारीपन लगने लगता है. ये नाक के पास ही साइनस में चला जाता है, साइनस नाक का वो खोखला हिस्सा होता है जो गाल के पास होता है.जबकि  साइनस एयर नाक के पास ही आंख होती है, वहीं से ये आंख में चला जाता है.

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एम्स पटना के मुताबिक भाप लेने से बढ़ सकता है फंगस का खतरा

एम्स पटना की ईएनटी विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर क्रांति ने बताया कि भाप लेने से ब्लैक फंगस होने का खतरा बढ़ जाता है, ऐसा नहीं है. सोशल मीडिया पर वायरल एक डॉक्टर के इस वीडियो के दावे के सवाल के जवाब में उन्होंने ये बात कही. इस वीडियो में कहा गया था कि लोग ज्यादा भाप ले रहे हैं इससे नाक के जरिए म्यूकोर शरीर में प्रवेश कर रहा है.

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पीजीआई चंडीगढ़ के मुताबिक मास्क बदलते रहने से नहीं होगा ब्लैक फंगस

पीजीआई चंडीगढ़ के ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर रमनदीप विरक ने बताया कि लोगों को मास्क को बदलते रहना जरूरी है, लेकिन एक ही मास्क लंबे समय तक लगाने से लोगों को म्यूकोर माइकोसिस हो रहा है, ये गलत है. 

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ब्लैक फंगस उनको होने का खतरा है जिन्हे हैं शुगर की बीमारी

इसका संक्रमण उन्हीं लोगों को होता है जो या तो शुगर के मरीज है और उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है. उन्होंने कहा कि ब्लड में शुगर की मात्रा अधिक हो और प्रतिरोधक क्षमता कम हो तो इस फंगस को आपके शरीर में भोजन मिल जाता है. ये हमारे आसपास ही मौजूद रहता है.

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कूलर की हवा में नहीं फैलता ब्लैक फंगस

ब्लैक फंगस कूलर की हवा में नहीं फैलता, ये हवा में, पौधों में, बाथरूम में और हमारे आसपास ही हो सकता है लेकिन ये उससे दूसरे व्यक्ति तक नहीं फैलता है. ये बहुत लोगों के शरीर के ऊपर भी हो सकता है, लेकिन संक्रमित उसी व्यक्ति को करता है जिसकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है.

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बीटाडीन गार्गल का नाक में नहीं करना चाहिए इस्तेमाल

एम्स के ईएनटी विभाग के डॉक्टर कपिल सिक्का ने बताया कि कई लोग ऐसे भी आए, जिन्होंने मुंह से बीटाडीन के गार्गल करने की बजाय नाक में इसका इस्तेमाल किया. ये जानलेवा हो सकता है, उन्होंने कहा कि कोरोना के मरीजों को बीटाडीन गार्गल करने के लिए कहते हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि नाक में इसका इस्तेमाल किया जाए.