महंगाई की तगड़ी मार : आम आदमी की थाली से अनाज की हो रही कमी गैस सिलेंडर के बाद अब आटा भी होगा महंगा टूटेगा 12 सालों का रिकॉर्ड

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महंगाई की दोहरी मार

महंगाई ने आम आदमी की रसोई पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है. जहां पहले रसोईघर में गैस सिंलेडर के दामों ने रुलाया वहीं अब आटे की कीमत पर भी महंगाई की नजर लगने वाली है. आटा ही नहीं आटे से बनने वाली चीजें ब्रेड और बिस्किट की कीमतें भी आने वाले दिनों में आपको मोटी रकम की चपत लगाते नजर आएगी. यानि पहले के मुकाबले कीमतों के बढ़ने से ज्यादा पैसे आपको जेब से निकालने होंगे. हालांकि सरकार ने कीमतों के बढ़ने की अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन जानकारों कीमतों में उछाल की पूरी आशंकाए देख रहे हैं.

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आटे की कीमत में अभी हो सकती है और बढ़ोत्तरी

उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल गेहूं की कीमतें अब तक 46 फीसदी तक बढ़ गई हैं. इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल है. बाजार में इसकी कीमत एमएसपी से 20 फीसदी अधिक है. इसी तरह, आटे का भाव अप्रैल में 32.38 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया था जो जनवरी, 2010 के बाद सबसे ज्यादा है. गेहूं में तेजी से एफएमसीजी कंपनियां आने वाले समय में आटे से बनने वाले उत्पादों के दाम 15 फीसदी तक बढ़ा सकती हैं. मंत्रालय का कहना है कि पिछले 1 साल में आम आदमी की थाली की हर चीजें महंगी हो गई हैं.

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अंतराष्ट्रीय बाजारों में गेहूं की बढ़ती मांग से भी आटे की बढ़ रही कीमत

अभी तक देश में आटे की कीमत मूल्य अप्रैल में 32.38 प्रति किलोग्राम पर देखी गई, जो 12 साल बाद रिकॉर्ड ऊंचाई स्तर पर है. 2010 जनवरी के बाद आटे में सबसे ज्यादा उछाल 2022 के अप्रैल महीने में देखा गया. इसके पीछे की वजह ये है कि गेहूं के उत्पादन और स्टॉक में कमी आई है. अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2022-23 में गेहूं का उत्पादन 1050 एलएमटी को छू लेगा.

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आटे से बनी वस्तुओं की कीमतों में भी हो रहा इजाफा

फिलहाल आटे की कीमत में इजाफे की वजह देश में गेहूं का उत्पादन और भंडार दोनों में आई गिरावट को भी माना जा रहा है. रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे जंग को भी कीमतों में वृद्धि का एक कारण माना जा रहा है, क्योंकि जंग की वजह से विदेशी बाजारों में गेहूं की मांग बढ़ गई है. रूस और यूक्रेन दोनों गेहूं के बड़े उत्पादक देश हैं. गेहूं उत्पादन वाले इलाकों में ज्यादा गर्मी की वजह से भी इस बार कम फसल की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा ईंधन की बढ़ती कीमतों का दबाव भी गेहूं की कीमतों पर पड़ रहा है.