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रविवार, सितम्बर 19, 2021

चिकनकारी के लिए मशहूर शहर में आज़ाद स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के सराहनीय कदम से आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं

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कहते हैं कि इंसान के हौसले से बड़ा कुछ नहीं हो सकता इंसान अगर ठान ले तो वो कुछ भी हासिल कर सकता है. ऐसा ही कुछ तहजीब और नफासत के लिए जाने वाले नवाबों के शहर लखनऊ में देखने को मिला. लखनऊ की नफासत और नजाकत के साथ ही यहां के लखनवी अंदाज से तो सभी रुबरु हैं, इसके साथ ही खाने वाले चिकन के साथ लखनऊ पहने जाने वाले चिकन के कपड़ों के लिए भी जाना जाता है, लेकिन मौजूदा दौर में लखनवी चिकन की तरफ लोगों का रुझान फीका पड़ता दिखाई दे रहा है, जिसको लेकर लखनऊ में स्वंय सहायता समूह की महिलाओं ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो वाकई काबिले तारीफ है. संस्था की महिलाओं की इस मुहिम ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जिससे इन्हे आत्मनिर्भरता के साथ रोजगार भी मिल रहा है और इनके इस काम के लिए प्रदेश सरकार भी इनका पूरा सहयोग करती दिखाई दे रही है.

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संस्था की महिलाओं की इस मुहिम ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जिससे इन्हे आत्मनिर्भरता के साथ रोजगार भी मिल रहा है .

महिला सशक्त होगी तो देश भी सशक्त होगा ये नारा,ये सोच लखनऊ में आजाद स्वंय सहायता समूह की महिलाओं ने कर दिखाया है. करीब 5 साल पहले पहले शुरु हुए आजाद स्वंय सहायता समूह की मुहिम से आज हजारों महिलाएं जुड़ी हुई हैं और इस मुहिम से अनेकों महिलाओं को रोजगार मिल रहा है. स्वयं सहायता समूह की महिलाएं आज इज्जत की रोटी खा रही हैं. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मनिर्भर बनने का सपना भी पूरा होता दिखाई दे रहा है.

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आज इस संस्था से जुड़ी महिलाएं 10 से 15 हजार रुपये प्रति महीने तक कमा रही हैं.

इस समूह में महिलाएं अपने हाथों के हुनर से सिलाई,हैंडक्राफ्ट,डिजाइनिंग कपड़े और भी कई तरह की कढ़ाई करती है जिनकी बाजार में अब काफी डिमांड है. इसके साथ ही चिकन कारीगरी में करीब 500 से ज्यादा महिलाएं काम कर रही है,जिनको मार्केट से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है.

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तनवीर फातिमा ने बताया कि जिस वक्त इस समूह की शुरुआत हुई उस समय समूह में केवल 10 महिलाएं थी.

आजाद स्वंय सहायता समूह की अध्यक्ष तनवीर फातिमा का कहना है कि,उन्होनें साल 2016 में इस समूह की शुरुआत की थी.उस वक्त उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी,लेकिन आज इस संस्था से जुड़ी महिलाएं 10 से 15 हजार रुपये प्रति महीने तक कमा रही हैं, उन्होने बताया कि जिस वक्त इस समूह की शुरुआत हुई उस समय समूह में केवल 10 महिलाएं थी,लेकिन उनकी और साथी महिलाओं की मेहनत की वजह से आज इस समूह से 2 हजार से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई है. जो अलग अलग क्षेत्र में अपना काम कर रही हैं.

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समूह में महिलाएं अपने हाथों के हुनर से सिलाई,हैंडक्राफ्ट,डिजाइनिंग कपड़े और भी कई तरह की कढ़ाई करती है जिनकी बाजार में अब काफी डिमांड है.

तनवीर फातिमा ने आगे ये भी बताया कि,उनके इस समूह को आगे बढ़ाने में सरकार का भी काफी योगदान रहा. सरकार ने समय समय पर फंड दिए,जिससे हमें संस्था को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली. इसके लिए तनवीर फातिमा ने सरकार का भी धन्यवाद किया, तनवीर फातिमा ने आगे बताया कि, आज उनको अपने माल को बेचने के लिए बाजार में जाना नही पड़ता है. उनका तैयार हुआ माल कारखाने से ही बिक जाता है. इसके अलावा कोरोना काल में जब देश की आधी से ज्यादा आबादी आर्थिक समस्या से जूझ रही है तो तनवीर फातिमा ने बताया कि, कोरोना काल में जब भारत समेत पूरा देश आर्थिक मंदी का मार झेल रहा था और लोगों को रोजगार के लिए इधर  उधर भटकना पड़ रहा था, लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा था. उस दौरान भी उनका काम काफी अच्छा चल रहा था,सरकार की ओर से उन्हें मास्क और अन्य जरुरी चीजें बनाने का ऑर्डर दिया गया. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ा, वहीं आजाद स्वंय सहायता समूह की इस पहल से  आज महिलाओं की कार्यशैली में काफी सुधार हुआ है.

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