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मंगलवार, अक्टूबर 19, 2021

कैसे जान लिया था स्वामी विवेकानन्द ने चीन होगा भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा ?

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आज 12 जनवरी स्वामी विवेकानन्द की जयंती के दिन को हम सभी राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाते हैं.स्वामी विवेकानन्द को युवाओं का आदर्श कहा जाता है.ऐसे में आइए आज हम जानते हैं कि स्वामी विवेकानन्द के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जो सच साबित हुई हैं.

स्वामी विवेकानंद ने समय से बहुत पहले कई ऐसी बातें कहीं, जो पूरी तरह सच साबित हुईं. उन्होंने 01 नवंबर 1896 को अपनी एक अनुयायी को एक पत्र लिखा. उसमें उन्होंने ये बताया कि कब भारत आजाद होगा.उन्होंने उस समय ये भी बता दिया था कि आजादी के बाद भारत के सामने सबसे बड़ा खतरा चीन होगा.

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भारत माता

स्वामी विवेकानंद ने ये पत्र अनुयायी मैरी को 01 नवंबर 1896 लिखा था. उसमें उन्होंने विस्तार से इस बारे में लिखा और बताया कि आज से 50 साल बाद क्या होगा. केवल यही नहीं उन्हें ये भी मालूम था कि आजादी के बाद भारत के सामने कौन सा संकट आएगा. उन्हें देश में घटित होने वाली भविष्य में कई बातों का अनुमान था. उन्होंने लिखा, 50 साल बाद कुछ समय के लिए लोग अपने भगवान को भूलकर केवल भारत माता को याद करेंगे. सभी भारत माता की जय-जयकार करेंगे और उनके सामने नतमस्तक होंगे.

स्वामी विवेकानन्द जी ने 50 साल पहले बता दिया था कि कब जाएंगे अंग्रेज
स्वामी विवेकानंद जी के उस समय लिखने का मतलब था कि 50 साल बाद भारत माता की परतंत्रता की बेड़ियां खुल जाएंगी. तब अंग्रेजों को यहां से जाना होगा. लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से 20वीं सदी के अंत में ये कहीं से नहीं लग रहा था कि कोई इस देश में अंग्रेजों की मजबूत सत्ता को हिला पाएगा.

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स्वामी विवेकानंद



 क्योंकि इस समय उनके खिलाफ ना तो कोई आंदोलन मजबूती से चल रहा था और ना ही देश में आजादी को लेकर कोई जुनून नजर आता था. लेकिन इन सब के बावजूद विवेकानंद जी की बात सही निकली,और करीब 50 साल बाद ही अंग्रेजों का शासन एकाएक भारत से खत्म हुआ और वो चले गए. भारत माता अब परतंत्रता की बेड़ियों से आजाद थीं.


विवेकानन्द जी ने बताया था कि कैसे मिलेगी आजादी
उन्होंने तब भारत की आजादी के बारे में ये भी कहा था कि उसे एकदम और बिल्कुल नए तरह से आजादी मिलेगी.क्योंकि हमने देखा भी कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जो हालात पैदा हुए. उसमें अंग्रेजों को देश छोड़कर जाना पड़ा लेकिन वहीं हमें आजादी देश को दो टुकड़ों में बंटने के बाद मिली.

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स्वामी विवेकानन्द शिकागो मे



स्वामी जी की बात आजादी के बाद कौन सा देश बनेगा खतरा
स्वामी विवेकानंद ने अनुमान जाहिर किया था कि जब अंग्रेज भारत को छोड़कर चले जाएंगे तब भारत के सामने चीन का खतरा सबसे बड़ा होगा.उस समय स्वामी जी की कही बात सही भी निकली. देश की आजादी के बाद 1962 में भारत का चीन से युद्ध हुआ. जिसमें हमारा केवल नुकसान ही नहीं हुआ बल्कि सेना के पैर उखड़ गए.साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हमारी छवि को गहरा धक्का लगा.

चीन के उभरने की बात की थी
स्वामी जी ने बताया था कि दुनिया में अंग्रेजों के बाद चीन और रूस मिलकर विश्व पर कमांड कर सकते हैं.और अगली जो भी खास बात होनी होगी, वो रूस और चीन से ही आएगी.

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1962 चीन-भारत युद्ध के समय जवाहर लाल नेहरू



विश्व युद्ध का खतरा भी नजर आया था
दोनों विश्व युध्द से पहले उन्होंने दुनिया में अनहोनी होते देखी थी. उन्होंने अनुमान लगाया था कि यूरोप बारूद के मुहाने पर बैठा है, जो किसी भी समय विस्फोट कर सकता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके बाद ही दो विश्व युध्द 1914 से 1918 और 1939 से 1945 तक सबसे ज्यादा अगर किसी को नुकसान हुआ तो वो यूरोपीय देश ही थे. फिर वर्ल्ड वार की शुरुआत भी यूरोप से हुई.शिकागो के 2 मिनट के भाषण में लोगों को किया आकर्षित
स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में 1893 में हुई विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था. उन्होंने शिकागो में अपने भाषण से सभी लोगों को चमत्कृत किया था. इसके बाद से ही अमेरिका और यूरोप में लोगों के दिलों मे भारतीय वेदांत दर्शन के प्रति दिलचस्पी जागने लगी थी.

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स्वामी विवेकानन्द


शिकागो सम्मेलन में उन्हें 02 मिनट का ही समय दिया गया था लेकिन जब उन्होंने भाषण की शुरुआत “मेरे अमेरिकी बहनों एवं भाइयों” से की, तो इस संबोधन ने वहां आए हुए सभी लोगों का दिल जीत लिया. इसके बाद उनके संबोधन के दौरान ना केवल खूब तालियां बजीं बल्कि उनकी बातों को बहुत ध्यान से सुना गया.


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