गंगाजल से कोरोना के इलाज वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने 6 हफ्ते में मांगा जवाब

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हाईकोर्ट ने 6 हफ्ते में आईसीएमआर से मांगा जवाब

गंगाजल से कोरोना का इलाज कराने को लेकर मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है और अब ये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है जिसमें ये दावा किया गया है कि गंगाजल से कोरोना का इलाज संभव है. इस याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. इसे लेकर हाईकोर्ट ने सेंट्रल गवर्नमेंट की एथिक्स कमिटी और ICMR को भी नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.

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संगम किनारे मौजूद लोगों ने भी गंगाजल को अमृत बताया है और कहा कि ये गंगाजल नहीं बल्कि गंगा अमृत है

हालांकि याचिका पर सुनवाई होने के बाद साधु संत और आम जनता का कहना है कि गंगा जल में कभी कीड़े नही पड़ते साथ ही गंगाजल में अनेकों प्रकार के एलिमेंट्स पाए जाते है जो शरीर के लिए लाभदायक होते है , इसलिए कोरोना का इलाज इससे संभव हो सकता है. हाईकोर्ट ने सेंट्रल गवर्नमेंट की एथिक्स कमिटी और ICMR दोनों संस्थानों को 6 हफ्ते का समय दिया है.

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स्वामी विश्वेश्वरा महाराज ने बताया कि गंगा नदी हिमालय से होकर प्रदेश के अन्य जिलों से होकर गुजरती है ऐसे में हिमालय में तरह-तरह की जड़ी बूटियां को अपने साथ लेकर वो हर जिले में आती है.

माई भारत की टीम ने इस विषय पर जब साधु संतों और आम नागरिकों से जानने की कोशिश की आखिर वो कितने सहमत हैं इस बात पर कि कोरोना मरीजों का इलाज गंगा जल से संभव है. जिस पर स्वामी विश्वेश्वरा महाराज ने बताया कि गंगा नदी हिमालय से होकर प्रदेश के अन्य जिलों से होकर गुजरती है ऐसे में हिमालय में तरह-तरह की जड़ी बूटियां को अपने साथ लेकर वो हर जिले में आती है.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल याचिका पर केंद्रीय और आईसीएमआर को 6 हफ्तों में जवाब देना है.

वैज्ञानिकों ने भी ये दावा किया है कि गंगाजल में कभी भी कीड़े नहीं लगते हैं चाहे जल जितना भी पुराना हो इसलिए गंगाजल में इंसान की इम्युनिटी को मजबूत बनाने साथ ही साथ प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में कारगर साबित होता है. हालांकि  कई जिलों में नदी में प्रदूषित पानी जरूर आता है लेकिन उससे गंगाजल को कोई हानि नहीं होती है.

वहीं  संगम किनारे मौजूद लोगों ने भी गंगाजल को अमृत बताया है और कहा कि ये गंगाजल नहीं बल्कि गंगा अमृत है. इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल याचिका पर केंद्रीय और आईसीएमआर को 6 हफ्तों में जवाब देना है. लोगो का कहना है कि जब वैज्ञानिक  गंगाजल पर और शोध करेंगे तो उनको परिणाम के रूप में ये जरूर देखने को मिलेगा कि गंगाजल में सभी वो तत्व मौजूद हैं जिससे शरीर मे हुए कोरोना को कम या खत्म किया जा सकता है.