COP-26: जलवायु परिवर्तन के लिए कितनी अहम होगी ये बैठक, और क्या है ये ग्लासगो एजेंडा

COP-26: जलवायु परिवर्तन के लिए कितनी अहम होगी ये बैठक, और क्या है ये ग्लासगो एजेंडा

COP-26: लगातार कुछ समय से जलवायु परिवर्तन से जुडे मुद्दे चर्चा मे बने हुए है। जलवायु संकट को लेकर कई चेतावनियों और अनुमानों के बीच अगले सप्ताह स्कॉटलैंड में एक बैठक होने वाली है जिसमे दुनिया भर के नेता जुटने वाले हैं। वहां पार्टियों का 26वां संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP-26)  होने जा रहा है। बताया जा रहा है की प्रधानमंत्री मोदी भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वे 29 अक्टूबर से दो नवंबर तक इटली और ब्रिटेन की यात्रा पर हैं। जहां वे स्कॉटलैंड के ग्लासगो में एक और दो नवंबर को कोप-26 में सम्मेलन मे शामिल होने वाले है।

अगर बात करे भारत की तो भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शुमार है, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार अपनी ओर से अधिक प्रयास कर रहा है। चीन के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जक है।

McCartney to Address Harmful Impact at COP26 Climate Summit - Apparel

इस बैठक के बारे में  केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बीते कुछ दिनों पहले कहा था कि दुनिया में कई प्रदूषक देशों के मुकाबले हमारा राष्ट्रीय रूप से निर्धारित योगदान (एनडीसी) ज्यादा उन्नति करने वाला है। भारत 2030 तक ऊर्जा क्षमता बढ़ाकर 450 गीगावॉट करने की ओर बढ़ रहा है। देश में 100 गीगावॉट से ज्यादा ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है।

यह बैठक संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष संस्था इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की उस कठोर चेतावनी के बाद आयोजित हो रही है जिसमें बताया गया है कि आने वाले कुछ सालों में मौसमी आपदाओं की बिगड़ती स्थिति से धरती के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। जलवायु परिवर्तन की दिशा में यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण बैठक बताई जा रही है। इससे पहले 2015 में कोप-21 की बैठक में पीएम मोदी ने हिस्सा लिया था और तब भारत ने पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किया था, जिसके मुताबिक भारत में इंटरनेशनल सोलर एलायंस बनाने का फैसला हुआ था।