Chhath puja 2021: क्या है छठ पूजा का महत्व, क्यों की जाती है यह पूजा? कौन है छठी मैया

Chhath puja 2021: क्या है छठ पूजा का महत्व, क्यों की जाती है यह पूजा? कौन है छठी मैया

कार्तिक महीने की छठी तिथि को छठ पूजा(Chhath puja) की शुरुआत हो जाती है। यह पर्व मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पूजा का व्रत संतान की प्राप्ति और लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। यह पर्व 4 दिनों तक मनाया जाता है। इस व्रत को स्त्री-पुरुष दोनों ही कर सकते हैं। छठ के दौरान महिलाएं लगभग 36 घंटे का व्रत रखती हैं। छठ के दौरान छठी मईया और सूर्यदेव की पूजा- अर्चना की जाती है। छठी मईया सूर्य देव की मानस बहन हैं।

कौन हैं छठी मईया :

धार्मिक मान्यता के अनुसार, छठ मईया को ब्रह्मा की मानस पुत्री कहा जाता है और कहा जाता है कि ये वही देवी हैं जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि को की जाती है। इनकी पूजा करने से संतान प्राप्ति व संतान को लंबी उम्र प्राप्त होती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इन्हें सूर्य देव की बहन भी माना जाता है।

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सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे ये है पौराणिक कथा :

पौराणिक कथा के मुताबिक छठ पर्व का आरंभ महाभारत काल के समय में माना जाता था। कर्ण जन्म सूर्यनारायण के द्वारा दिए गए वरदान के कारण कुंती के गर्भ से हुआ था। इसलिए ये सूर्य पुत्र कहलाते हैं और सूर्यनारायण की कृपा और इनको कवच व कुंडल प्राप्त हुए थे व सूर्य देव के तेज और कृपा से ही ये तेजवान व महान योद्धा बने। कहा जाता है कि इस पर्व की शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण के द्वारा सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य पूजा करते थे एवं उनको अर्घ्य देते थे। इसलिए आज भी छठ में सूर्य को अर्घ्य देने परंपरा चली आ रही है। इस संबंध में एक कथा और मिलती है कि जब पांडव अपना सारा राज-पाठ कौरवों से जुए में हार गए, तब दौपदी ने छठ व्रत किया था। इस व्रत से पांडवों को उनका पूरा राजपाठ वापस मिल गया था।

सूर्य को जल देने का महत्व :

सूर्य को पृथ्वी पर जीवन का आधार माना जाता है। सूर्य को जल देने सेहत, संबंधी फायदे भी प्राप्त होते हैं। जीवन में जल और सूर्य की महत्ता को देखते हुए छठ पर्व पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके अलावा सूर्य को जल देने का ज्योतिष महत्व भी माना जाता है। भगवान सूर्य नारायण की कृपा से व्यक्ति को तेज व मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।