स्पॉन्डिलाइटिस के दर्द से हैं परेशान , तो अपनाएं ये उपाय

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 वर्किंग कल्चर के बदलने से सबसे ज्यादा असर हमारी सेहत पर पड़ रहा है। लगातार 8-9 घंटे कुर्सी पर जमे हुए कंप्यूटर स्क्रीन में आंखें गढ़ाते हुए काम करना कई बीमारियों को दावत देता है। उन्ही मे से एक बीमारी है स्पॉन्डिलाइटिस । नतीजा कमर, गर्दन, सिर दर्द हमें सौगात में मिल रहे हैं। यही दर्द सरवाइकल बनकर लाइलाज बन जाते हैं। समय से पहले ही हमारा शरीर जवाब देने लगता है।

रीढ़ की बीमारियां अधिक तेजी से बढ़ रही हैं। गर्दन और उसके आसपास के हिस्सों में दर्द रहने लगता है। आज के समय में सुख-सुविधाएं जुटाने के लिए लोग अपने शरीर पर जरूरत से ज्यादा भार डाल रहे हैं। शरीर पर ध्यान देने के लिए हमारे पास समय नहीं है। अगर इस समस्या का इलाज समय रहते करा लिया जाए तो इस बीमारी से आसानी से बचाव हो सकता है।

स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या गंभीर होने पर यह सिर्फ जोडमें तक ही सीमित नहीं रहती। समस्या गंभीर होने पर बुखार, थकान, उल्टी होना, चक्कर आना और भूख की कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ अत्यंत गंभीर मामलों में यह फेफड़ों और हृदय की समस्या भी विकसित कर सकता है।

अगर आप भी सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के दर्द से परेशान हैं तो यहां दिये उपायों की मदद से  इस दर्द और स्टिफनेस से राहत पा सकते हैं।

  1. गर्दन और कंधे पर सिंकाई करें

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के सीवियर पेन से रिलीफ पाने के लिए गर्दन और कंधे पर कोल्‍ड और हीट पैड से सिंकाई करें. इससे स्टिफनेस कम होगी और मांसपेशियों को दर्द से आराम मिलेगा.

2. नियमित रूप से योग करें

कुछ योग मुद्राएं जैसे पद्मासन, यष्टिकासन, ताड़ासन सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस के दर्द को कम करने में बहुत मददगार होती हैं. सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के दर्द को कम करने के लिए इसे नियमित रूप से करें.

3. एक्‍सरसाइज करना लाभदायक

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के दर्द से बचने के लिए रोजाना एक्‍सरसाइज करें. कुछ दिनों में इसका असर दिखने लगेगा और आप रिकवर जल्‍द कर पाएंगे.

4. आयुर्वेद का लें सहारा

जड़ी-बूटी जैसे हल्‍दी, अदरक, मेथी, अश्‍वगंधा और गुग्‍गुल को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. इनमें एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण होते हैं जो सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस के दर्द को कम करने में मदद करते हैं. मेथी, अदरक, हल्‍दी जैसी जड़ी-बूटी को अपने भोजन में शामिल करें लेकिन गुग्‍गुल और अश्‍वगंधा को बिना एक्‍सपर्ट के सजेशन के ना इस्‍तेमाल करें.

5. नहाने में करें खास नमक का प्रयोग

नहाने के लिए गुनगुना पानी लें और इसमें एप्‍सोम सॉल्‍ट (Epsom Salt Bath) का प्रयोग करें. इसमें मौजदू मैग्‍नेजियम स्टिफनेस, सूजन को कम करता है. कंधे और गर्दन के दर्द में भी यह आराम देता है.

6. काम के बीच में ब्रेक

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने और खड़े होने से बचें। नियमित रूप से ब्रेक लेना अपनी आदत बना लें और हर दो घंटे के बाद ब्रेक लें। इससे शरीर को आराम मिलेगा।

7. सोने का सही तरीका

सरवाइल के मरीजों को सोने के समय भी खास ध्यान रखना चाहिए। सोने के लिए सामान्य स्थिति बनाए रखें। तकीए का इस्तेमाल ना करें। अगर जरूरत है तो कम मोटाई वाला नरम तकीया इस्तेमाल करें। सोने के लिए लकड़ी का तख्त या जमीन पर बिस्तर लगाएं। खाट या फोलडिंग पलंग के इस्तेमाल से बचें।