सावन के आखिरी सोमवार पर एकादशी का अनोखा संयोग

रांची. महादेव का प्रिय महीना सावन अब समाप्ति की ओर है. 12 अगस्त 2022 को सावन खत्म हो जाएगा और भाद्रपद महीने की शुरुआत हो जाएगी. भोलेनाथ की भक्ति के लिए सावन का सोमवार बहुत उत्तम माना जाता है. मान्यता है इस दिन व्रत रख सच्चे मन रुद्राभिषेक करने से तमाम सुखों की प्राप्ति होती है. रुद्राभिषेक का मतलब है भगवान रुद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग का मंत्र सहित अभिषेक. अगर सावन में भोलेनाथ का रुद्राभिषेक न कर पाएं हो तो सावन के आखिरी सोमवार पर रुद्राभिषेक कर भोलेनाथ की कृपा पाने का अवसर है.

कहते हैं सावन सोमवार के दिन शिव का रुद्राभिषेक करने से समस्त रोगों का नाश होता है और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है. ज्योतिर्लिंगों में से एक देवघर बाबा मंदिर में देश के कोने कोने से कांवरिया जुट रहे हैं. बिहार के सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने को लेकर भक्त पहुंच रहे हैं. शहर की गली-गली में बोलबम का नारा गूंज रहा है. श्रावण मास की तीसरी सोमवारी को लेकर देवघर में भक्तों में उत्साह देखा जा रहा है.

सावन को चौथे और आखिरी सोमवार पर एकादशी और रवि योग का संजोय बन रहा है. इस दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पवित्रा एकादशी भी है. सावन पवित्रा एकादशी को पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की आराधना से समस्त पाप खत्म हो जाते हैं. वहीं रवि योग में शिव-विष्णु की पूजा बहुत लाभकारी मानी जाती है. रवि योग इतना प्रभावशाली होता है कि इसमें देवी-देवताओं की आराधना से समृद्धि में वृद्धि होती है. शुभ कार्य सफल हो जाते हैं.

ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव की पहली पत्नी देवी सती ने जब अपने पिता के घर पर अपने पति शिव का अपमान होते देखा तो वो बर्दाश्त नहीं कर पाईं और राजा दक्ष के यज्ञकुंड में अपनी आहूति दे दी. इसके बाद उन्होंने हिमालय पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया. पार्वती के रूप में भी उन्होंने भगवान शिव को भी अपना वर चुना और उनकी प्राप्ति के लिए कठोर तप किया.

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