शरीफा यानि सीताफल का रामायण कनेक्शन

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शरीफा फल देखने में जितना अनगढ़ और अजीब है, खाने में उतना ही स्वादिष्ट और गुणों से भरपूर है. यह ऐसा फल है, जिसकी मिठास कुछ ‘अलग किस्म’ की है और उसको बयान नहीं किया जा सकता. लेकिन फूड एक्सपर्ट इसे विशेष फल मानते हैं. आयुर्वेदाचार्य भी इस फल के मुरीद हैं. यह विदेशी फल है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि भारत के कुछ प्राचीन मंदिरों व गुफाओं में शरीफे को उकेरा गया है.

सबसे पहले जंगलों में उगा शरीफा
शरीफा जिसे भारत के कुछ राज्यों में सीताफल भी कहा जाता है. इसलिए इसे रामायण काल से भी जोड़ा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि वनवास के दौरान माता सीता ने श्रीराम को इस फल को खाने के लिए दिया था, तब से इसका नाम सीताफल पड़ गया. विशेष बात यह है कि देखने में यह फल जंगली भी लगता है. यह बड़ा अनगढ़ है. देखने में भी आकर्षक नहीं है. लेकिन अंदर से इसका गूदा बहुत ही मीठा होता है और यह मिठास भी कुछ अलग हटकर है.

फलों के इतिहास से जुड़ी पुस्तकें बताती हैं कि यह फल वाकई सबसे पहले जंगलों में उगा और उसके बाद ही खेती की गई. भारत में यह आंध्रप्रदेश, आसाम, मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में उगाया जाता है. जैसे ही सर्दियां आने वाली होती है, यह बाजारों में दिखने लग जाता है और दो-ढाई माह के बाद गायब हो जाता है.

अमेरिका है इसका उत्पत्ति स्थल
फलों के इतिहास से जुड़े एक्सपर्ट मानते हैं कि शरीफे की उत्पत्ति 1000 ईसा पूर्व अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों विशेषकर ग्वाटेमाला में हुई. वहां ये अपने-आप उगा. बाद में इसकी मिठास देखकर अमेरिकी वासियों ने इसे उगाना शुरू किया. एक विचार यह भी है कि यह फल वेस्टइंडीज में सबसे पहले उगा. धीरे-धीरे यह फल दूसरे देशों में भी पहुंचा. आज शरीफे की खेती ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चिली, मिस्र, इज़राइल, बर्मा, फिलीपींस, स्पेन, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका आदि में भी हो रही है.

अजंता की गुफाओं में उकेरा गया है फल
भारत में इस फल के उत्पत्ति काल को लेकर बहुत स्पष्टता नहीं है. लेकिन कुछ प्रमाण बताते हैं कि यह फल भारत में प्राचीन काल से उगाया जा रहा है. लेखक व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत चौधरी ने अपनी पुस्तक ‘VEGETABLES’ में जानकारी दी है कि आइने-अकबरी में इस फल का जिक्र है. लेकिन ऐसा भी कहा जाता है कि पुर्तगाली जब भारत आए तो अन्य फलों व जिन्स की तरह वे शरीफे को भी लेकर आए. उनका कहना है कि भारत के प्राचीन ग्रंथों में इस फल की जानकारी नजर नहीं आती. हैरानी की बात यह है कि अजंता की गुफाओं में इस फल को उकेरा गया है. इसके अलावा मथुरा के कुछ प्राचीन मंदिरों में देवताओं की मूर्तियों के साथ शरीफे को भी अंकित किया गया है.