लखनऊ विश्वासघात के मामलों में सबसे आगे, NCRB रिपोर्ट में खुलासा

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पूरे देश में सबसे अधिक विश्वासघात (ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) के मामले लखनऊ में दर्ज किए गए हैं। एनसीआरबी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में आईपीसी की धारा 406 और 409 के तहत 3926 केस दर्ज हुए। इनमें से एक तिहाई करीब 1526 मामले लखनऊ के हैं। दूसरे नंबर पर मुंबई और दिल्ली तीसरे स्थान पर है। लखनऊ में आर्थिक अपराध का भी ग्राफ पिछले तीन सालों की तुलना में बढ़ा है।

एनसीआरबी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद में 595, कानपुर में 433 और लखनऊ में 3440 केस आर्थिक अपराध के दर्ज हुए। इनमें विश्वासघात के मामलों पर नजर डाली जाए तो गाजियाबाद में 202, कानपुर में 134 और लखनऊ में 1526 केस हैं। अन्य तरह की ठगी के मामले में गाजियाबाद में कुल 393, कानपुर में 299 और लखनऊ में 1879 मामले दर्ज हुए हैं।

आर्थिक अपराध तीन साल में सबसे अधिक
पिछले तीन साल के आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ में अन्य दो महानगरों की तुलना में छह से सात गुना अधिक आर्थिक अपराध हुआ। गाजियाबाद में 2019 में 378, कानपुर में 437 तो लखनऊ में 3011 केस दर्ज हुए। वहीं, 2020 में यह आंकड़ा क्रमश: 567, 281 और 2224 रहा। बीते साल 2021 में इस आंकड़े में हर जगह बढ़ोतरी हुई। गाजियाबाद में 595, कानपुर में 433 और लखनऊ में 3440 केस दर्ज हुए।

साइबर अपराध में भी आगे
आंकडे़ बताते हैं कि साइबर अपराध में काफी गिरावट आई है। 2019 में गाजियाबाद में 347, कानपुर में 365 और लखनऊ में 1262 केस दर्ज हुए तो वहीं 2020 में क्रमश: 756, 300 व 1465 और 2021 में 451, 449 और 1067 मामले दर्ज हुए। वहीं, साइबर अपराध के दूसरे तरीके सेक्साटॉर्सन के मामले में भी लखनऊ सबसे आगे रहा। गाजियाबाद में 2021 में 15 मामले आए तो लखनऊ में 58 केस दर्ज किए गए।

ऑनलाइन यौन उत्पीड़न के मामले में कानपुर सबसे आगे रहा, जहां 81 मामले दर्ज किए गए। वहीं, गाजियाबाद में पांच और लखनऊ में 18 मामले सामने आए। इसके अलावा साइबर ठगी के गाजियाबाद में 376 और लखनऊ में 423 तो कानपुर में एक भी मामले सामना नहीं आया। साइबर फ्राड के जरिये अवैध वसूली के मामलों में भी लखनऊ आगे रहा। यहां ऐसे 602 केस दर्ज किए गए।

पिछला साल बुजुर्ग रहे सुरक्षित
आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में पिछले साल वरिष्ठ नागरिकों के साथ कोई बड़ी वारदात नहीं हुई। हालांकि, इस दौरान उनकी फरियाद भी ज्यादा सुनी गई। 2019 में 8, 2020 में 46 और 2021 में 52 मामले सामने आए। इसमें हत्या व डकैती जैसी बड़ी वारदात वरिष्ठ नागरिकों के साथ नहीं हुई। वहीं, चोरी के 11, लूट का एक और ठगी के नौ मामले सामने आए।