रेगिस्तान में लाशों का अंबार, बीकानेर में हजारों गायों की मौत!

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उत्तर भारत के कई राज्यों में बीते कुछ महीनों से पशुओं पर लंपी बीमारी का कहर लगातार जारी है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब तक लंपी की चपेट में आने से 40 हजार से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है. वहीं, 10 लाख से ज्यादा गोवंश इसकी वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. लंपी के कहर के बीच बीकानेर से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है जहां रेगिस्तान में लाशों का मैदान दिखाई दे रहा है. बीकानेर के जोडबीड डंपिंग यार्ड से हैरान करने वाली तस्वीरें आई है जिनको लेकर दावा किया जा रहा है कि यार्ड में हजारों गायों के शव कई किलोमीटर तक पड़े हैं.
गायों की कई किलोमीटर तक फैली लाशें देखकर किसी का भी दिल सहम जाएगा. यार्ड में मृत पशुओं की वजह से 5 किलोमीटर तक के इलाके में दुर्गंध फैली हुई है. वहीं इतने बड़े एरिया में गायों की लाशें फैली होने के बाद सवाल उठता है कि क्या सरकार गायों में लंपी वायरस को फैलने से रोकने में नाकाम साबित हुई है.

वहीं क्या यहां पड़े सभी पशुओं की मौत वाकई लंपी स्किन बीमारी से हुई है. इधर तस्वीरें वायरल होने के बाद अब प्रशासन हरकत में आया और बीकानेर नगर निगम ने एरिया की एक रिपोर्ट तैयार करवाई है.

यार्ड में हर दिन आते हैं 100 से अधिक मृत पशु
बता दें कि 5646 हेक्टेयर में फैले जोड़बीड गिद्ध संरक्षण क्षेत्र के तौर पर विकसित किया गया है जहां मृत गौवंश के शवों का निस्तारण किया जाता रहा है. पिछले कई सालों से मृत पशुओं के शवों को यहां फेंका जाता है और हर दिन आस-पास के गांवों से 100 से अधिक मृत पशु यहां आते हैं.

इसके अतिरिक्त गौशाला संचालक और आसपास के गावों के लोग भी अपने मृत पशु यहां डालते हैं. हालांकि जानवरों के इतनी बड़ी संख्या में शव होने से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को अब काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं बीकानेर के आंकड़ों की बात करें तो अकेले बीकानेर शहर में 6 हजार से ज्यादा गायें लंपी की चपेट में आ चुकी है.

वहीं मृत जानवरों की फोटो वायरल होने के बाद नगर निगम हरकत में आया है और निगम का कहना है कि हर साल मृत पशुओं के शवों को उठाने के लिए ठेका दिया जाता है लेकिन फिलहाल रामदेवरा और पूनासार मेले के चलते श्रमिक नहीं हैं इसलिए चमड़ा निकालने का काम धीमा पड़ गया है इसलिए इलाके में ज्यादा हड्डियां और मृत पशु एकत्रित हो गए हैं. वहीं अब संयुक्त निदेशक पशुपालन, उपवन संरक्षक वन्य जीव बीकानेर ने जोडबीड़ का दौरा किया है.