रात में सिर्फ 8 घंटे सोना ही नहीं है ज़रूरी, अच्छी नींद लेना भी है उतना ही महत्वपूर्ण

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यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया, सैन फ्रांसिस्को के शोधकर्ताओं का कहना है कि सही समय और पर्याप्त नींद लेने वाले ना सिर्फ मनोवैज्ञानिक रूप से दुरुस्त रहते हैं, बल्कि वे न्यूरोडीजेनेरेटिव के प्रतिरोधी भी होते हैं जिससे न्यूरोलॉजिकल डिसीस का खतरा कम होता है. यह स्टडी ‘आईसाइंस’ नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है।

सेहतमंद जीवन के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। अक्सर आपने देखा होगा कि डॉक्टर लोगों को करीब 8 घंटे सोने की सलाह देते हैं। लेकिन एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि इंसान के लिए सिर्फ 8 घंटे नहीं, बल्कि अच्छी नींद लेना भी बहुत जरूरी है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के शोधकर्ताओं का कहना है कि अच्छी अच्छी नींद लेना भी बहुत जरूरी है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के शोधकर्ताओं का कहना है कि अच्छी नींद लेने वाले ना सिर्फ मानसिक रूप से दुरुस्त रहते हैं, बल्कि वे न्यूरोडिजेनेरेटिव के प्रतिरोधी भी होते हैं जिससे न्यूरोलॉजिकल डिसीस का खतरा कम होता है। यह स्टडी ‘आईसाइंस’ नाम के जर्नल में प्रकाशित हुई है।

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प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट और स्टडी के प्रमुख लेखकों में से एक लुइस प्तासेक ने कहा, ‘ऐसा कहा जाता है कि हर किसी के लिए रोजाना लगभग 8 घंटे की नींद लेना ज़रूरी है, लेकिन हमारी स्टडी बताती है कि हर इंसान की नींद आनुवांशिकी पर निर्भर करती है। इसे आप कद के रूप में समझ सकते हैं। कद का कोई परफेक्ट अमाउंट नहीं होता है। हर इंसान अलग है। हमने नींद के मामले में भी बिल्कुल यही पाया है।

लुइस और सहायक लेखक यिंग-हुई फू करीब एक दशक से UCSF वेइल इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरोसाइंसेस के सदस्य हैं और फैमिलियल नेचुरल शॉर्ट स्लीप (FNSS) के लोगों पर अध्ययन कर रहे हैं जो रात में करीब चार से छह घंटे की नींद लेते हैं। उन्होंने बताया कि परिवारों में अक्सर ऐसा चलता है। अब तक ऐसे पांच जीनोम की पहचान की गई है जिनकी नींद में बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, अभी भी ऐसे कई FNSS जीन्स खोजने बाकी हैं।

स्टडी में फू की हाइपोथीसिस को भी टेस्ट किया गया कि न्यूरोडीजेनरेटिव डिसीस के खिलाफ नींद एक रक्षा कवच हो सकती है। आम धारणा है कि नींद की कमी कई लोगों न्यूरोडीजेनेरेशन को तेज कर सकती है। इस स्टडी के नतीजे इसके उलट हैं। फू ने कहा कि अंतर यह है कि FNSS के साथ दिमाग अपना स्लीप टास्क कम समय में पूरा करता हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो थोड़े समय की पर्याप्त नींद को नींद की कमी के समान नहीं समझा जा सकता।

फू ने बताया कि उनकी टीम ने अल्जाइमर की बीमारी को समझने के लिए माउस मॉडल को देखा। उन्होंने ऐसे चूहों को चुना जिनमें कम नींद और अल्जाइमर के लिए पूर्वनिर्धारित जीन दोनों थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि उनके दिमाग में हॉलमार्क एग्रीगेट्स बहुत कम मात्रा में विकसित हुआ जो कि डेमेंशिया से जुड़ा है।अपने निष्कर्षों की पुष्टि के लिए उन्होंने एक अलग शॉर्ट स्लीप जीन और एक अन्य डिमेंशिया जीन के साथ चूहों पर एक्सपेरीमेंट को दोहराया और यहां भी इसी तरह के परिणाम सामने आए।

फू और प्तासेक का कहना है कि दिमाग से जुड़ी तमाम कंडीशंस का इसी तरह की जांच से पता चलेगा कि अच्छी नींद जीन को कितनी सुरक्षा प्रदान करती है। इससे लोगों की नींद में सुधार से कई तरह की दिमागी बीमारियों से राहत मिल सकती है। प्तासेक ने कहा कि दिमाग से जुड़ी सभी बीमारियों में नींद की समस्या आम है। नींद एक जटिल गतिविधि है। आपके सोने और जगाने के लिए आपके दिमाग के कई हिस्सों को एकसाथ काम करना पड़ता है। जब दिमाग के ये हिस्से डैमेज हो जाते हैं तो इंसान के लिए अच्छी नींद लेना बहुत मुश्किल हो जाता है।