यूपी में बाढ़ से जन जीवन अस्त-व्यस्त, बाढ़ की चपेट में 25 लाख लोग, मकान पानी में समा गए

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यूपी के कई शहरों में पिछले कई दिनों से हो रही बारिश तो अब थम गई है लेकिन अब भी कई इलाकों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं. यूपी के अयोध्या में जगह-जगह पानी भरा हुआ है और लोगों को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लगातार हुई बारिश के चलते जगह-जगह पानी भर जाने के कारण आम जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.
हालांकि, अब यूपी में बारिश थम गई है. मौसम विभाग की मानें तो अब कुछ दिनों तक यूपी में बारिश देखने को नहीं मिलेगी. वहीं, तापमान भी अब 32 डिग्री के आसपास दर्ज किया जाएगा. यूपी में अब भले ही बारिश थम गई हो लेकिन अयोध्या में बारिश का पानी अब भी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है. सिर्फ अयोध्या ही नहीं बल्कि यूपी के 15 जिलों के 15 गांवों में 25 लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में है.
अयोध्या का गुप्तार घाट, जहां आम दिनों में हजारों पर्यटक आते हैं, आज वहां बस बाढ़ का पानी नजर आ रहा है. पर्यटकों के लिए बनी कुर्सियां पानी में समा गई हैं. और तो और मंदिरों तक पानी पहुंच गया है. इस इलाके में मौजूद दुकानदार बताते हैं कि बाढ़ की वजह से व्यापार चौपट हो गया है और उन्हें दुकानें तक हटानी पड़ी हैं. वहीं, सरयू घाट पर पानी काफी सीढियां ऊपर आ चुका है, जिसकी वजह से वहां आरती भी नहीं हो पा रही है. प्रशासन ने वहां एक चेतवानी बोर्ड भी लगा दिया हैं जिसमें डूबने का खतरा बताते हुए आगे ना जाने की हिदायत दी गई है.

अयोध्या में सरयू के उफान से भीषण बाढ़ आई है. अयोध्या में बना डेमवा पुल जो जिले के जाने का मार्ग है, उसकी सड़क कटकर पानी में बह गई है और आवागमन रुक गया है. आसपास के गांव और पुलिस चौकी भी पानी में समा गई है. यूपी में राप्ती, शारदा, घाघरा, कोसी, मुहाना, सुहेली समेत कई नदियां उफान पर हैं. नदियों के उफान और नेपाल से पानी छोड़े जाने की वजह से अयोध्या, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बदायूं, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, शाहजहांपुर, सीतापुर, संत कबीर नगर और सिद्धार्थ नगर बाढ़ ग्रसित हैं.
यूपी में बाढ़ के हालातों पर बात करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले बाढ़ अगस्त या सितंबर में आती थी. लेकिन इस बार अक्टूबर में विजयदशमी के बाद आई बाढ़ अप्रत्याशित है. सीएम योगी ने निर्देश दिया है कि सभी मंत्री समूह अपने प्रभार वाले मंडलों और जिलों का तत्काल भ्रमण कर राहत और बचाव कार्य में सहयोग करें. वहीं, बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रखने और क्षेत्र में नुकसान का आकलन करने का आदेश दिया गया है.