मुलायम सिंह यादव के इस गांव में अब है…यूनिवर्सिटी से लेकर हवाई पट्टी

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सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव जिस सैफई गांव में जन्मे, उसे विश्वमंच पर चमकाया भी है। आज सैफई की पहचान एक ऐसे गांव की है, जहां प्राथमिक विद्यालय, विश्वविद्यालय और हवाई पट्टी से लेकर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तक है। इस गांव के जरिए उन्होंने एक नया मॉडल देने का प्रयास किया।

इटावा जिले का नाम आते ही आंखों के सामने बीहड़ का नजारा तैरता है लेकिन सैफई शब्द सुनने पर एक ऐसे गांव की छवि सामने आती है, जहां महानगरों की तरह हर सुविधाएं हैं। करीब सात हजार की आबादी वाले इस गांव से निकलकर मुलायम सिंह यादव सियासी फलक पर छा गए। सैफई के पास से मैनपुरी-इटावा चार लेन स्टेट हाईवे गुजरता है। साथ ही यह गांव आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से भी जुड़ा है। मुलायम सिंह ने गांव में सिर्फ अस्पताल ही नहीं यूपी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेस और नर्सिंग व फार्मेसी कॉलेज बनाया। इस विवि में होने वाले सेमिनार में देश ही नहीं दुनिया भर से चिकित्सा विशेषज्ञ आते हैं। ये विशेषज्ञ यहां आने के बाद सैफई देखने के बाद ही लौटते हैं।

इतना ही नहीं गांव के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में क्रिकेट स्टेडियम और एथलेटिक्स स्टेडियम भी बना है। हवाई पट्टी पर यहां वर्ष 2015 में वायुसेना ने मिराज 2000 को उतारा था और वर्ष 2018 में वायुसेना ने यहां अभ्यास भी किया था। इसकी वजह से सैफई की चर्चा दुनियाभर में हुई। गांव में कांवेंट स्कूल और डिग्री कॉलेज भी हैं। यहां के डिग्री कॉलेज में बायोटेक्नोलॉजी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन जैसे विषयों की भी पढ़ाई हो रही है।

सैफई में 24 घंटे बिजली की सुविधा है। जलापूर्ति से लेकर जल संचयन का भी इंतजाम है। यहां बने बहुमंजिला इमारत दिल्ली और मुंबई की याद दिलाते हैं। इसे लेकर कई बार आलोचना हुई लेकिन मुलायम सिंह ने इसकी परवाह नहीं की। इसी गांव से वह नेताजी बनकर निकले और पूरी पार्टी के लिए इसी नाम से पहचाने जाने लगे। जो गांव मुलायम सिंह के नाम पर इतराता था, अब वहां शोक का माहौल है।


भव्य सैफई महोत्सव से मिलीं सुर्खियां
प्रदेश की सत्ता में रहते हुए सपा ने भव्य सैफई महोत्सव का आयोजन किया। यह चर्चा का विषय रहा। कभी इसके बजट को लेकर तो कभी फिल्म अभिनेत्रियों को लेकर आलोचना भी हुई। सैफई महोत्सव के दौरान यहां वीआईपी की लाइन लग जाती थी।