बिजनौर- 22 गांवों में बाघ का खतरा बढ़ा, करना पड़ा संवेदनशील घोषित, कई लोग बन चुके हैं शिकार

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बिजनौर- वन विभाग की बिजनौर डिवजीन में अमानगढ़ और नगीना रेंज के 22 गांवों को बाघों की मौजूदगी के कारण संवेदनशील घोषित किया गया है। इन गांवों में बाघों के आने का खतरा है, ऐसे में इन गांवों में मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा वन विभाग ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए रेस्क्यू एंड रेस्पांस टीम का गठन भी किया है। पूरे दिसंबर को वन विभाग ने बाघ संरक्षण माह घोषित कर दिया है।

जिले में अमानगढ़ वन रेंज के अलावा नगीना और बढ़ापुर के जंगलों में भी बाघों की मौजूदगी मिलती रही है। सर्दी शुरू होते ही गन्ने के खेत खाली होने लगे हैं, ऐसे में जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में बाघों की मौजूदगी दिखने लगती है। अमानगढ़ और नगीना रेंज से सटे गांवों को इसके लिए संवेदनशील घोषित कर दिया है। इन दोनों रेंज में 42 गांव जंगल सीमा के पास हैं, लेकिन वन विभाग ने 22 गांवों को संवेदनशील माना है। इन गांवों में बाघ और इंसानों के बीच संघर्ष होने की आशंका के चलते अब यहां पर ग्रामीणों को बाघों के व्यवहार से परिचित कराया जाएगा। ताकि ऐसी स्थिति आने पर कोई अनहोनी न हो। रिजर्व जंगल से भटककर आबादी में पहुंचे बाघ व अन्य वन्य जीवों को रेस्क्यू करने के लिए हर रेंज पर रेस्क्यू एंड रेस्पांस टीम का गठन भी कर दिया गया है।

अमानगढ़ में 27 से ज्यादा बाघ
जिले की अमानगढ़ वन रेंज 80 वर्ग किलोमीटर में फैली गई है। पुरानी गणना के मुताबिक, यहां 27 बाघ देखे गए थे। वर्तमान में इनकी संख्या इससे ज्यादा भी होने की संभावना है। ऐसे में अमानगढ़ के पास गांवों में बाघों के देखे जाने की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं। करीब दस साल पहले अमानगढ़ से सटे गांवों में एक बाघ ने कई लोगों की जान ली थी। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग इस बार आबादी वाले क्षेत्रों में तैयारी कर रहा है।

संवेदनशील गांवों की लिस्ट
अमानगढ़ से सटे गांव : देवानंदपुर गढ़ी, रेहड़, नवाबाद जंगल, केहरीपुर जंगल, किरतपुर, रानीनांगल, फतेहपुर धारा, कल्लूवाला, लालबाग, मलौनी, मीरापुर उत्तरी।


नगीना रेंज से सटे गांव : भिक्कावाला, बनियोंवाला, इस्लामनगर, मुरलीवाला, जामुनवाला, लड्डूवाला, खैरीखत्ता, जमनपुर, रसूलपुर, रसूलाबाद, प्रेमपुरी।