नसीरुद्दीन शाह को याद आया अपना वतन। बचपन के घर आंगन को देखकर हुए भावुक।

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शाह का जन्म 20 जुलाई 1950 को यूपी के बाराबंकी शहर के घोसियाना मोहल्ला में हुआ. इसकी जानकारी शहर के बाशिंदों को तब हुई जब वह अपनी पैदाइश के करीब छह दशक बाद अचानक अपनी पत्नी के साथ अपनी जन्मस्थली बाराबंकी के घोसियाना मोहल्ले में एक खंडहरनुमा कोठी पहुंचे. इस दौरान इस अभिनेता ने अपनी पत्नी के साथ अपने बचपन की पुरानी बातों को साझा किया.

आज यानी 20 जुलाई को अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का जन्म दिन है. अपने दमदार अभिनय से फिल्म जगत में एक अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को वैसे तो सभी जानते हैं, लेकिन उनकी जन्मस्थली के बारे में शायद ही किसी को मालूम हो. इस ख़ास दिन पर हम आज इस राज से भी पर्दा उठाये दे रहे हैं, जिसका कुछ साल पहले तक उनके शहर के अधिकांश बाशिदों को भी पता नहीं था कि कला फिल्मों को एक खास मुकाम दिलाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता नसीरुद्दीन का जन्म यूपी के बाराबंकी में हुआ था. यह बात लोगों को तब पता चली, जब लगभग चार साल पहले अचानक नसीरुद्दीन शाह खुद अपनी पत्नी के साथ अपने पैदायशी मकान में आ पहुंचे. उनके मकान में रहने वाले मो. युनुस बताते हैं कि नसीरुद्दीन के आने के बाद इस खंडहरनुमा कोठी को नई पहचान मिल गई है. अब यहां आते ही लोग कहते हैं कि यह नसीरुद्दीन शाह का मकान है.1/ 6

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बता दें कि छह दशक पहले नसीरुद्दीन शाह का जन्म 20 जुलाई 1950 को यूपी के बाराबंकी शहर के घोसियाना मोहल्ला में हुआ. इसकी जानकारी शहर के बाशिंदों को तब हुई, जब वह अपनी पैदाइश के करीब छह दशक बाद अचानक अपनी पत्नी के साथ अपनी जन्मस्थली बाराबंकी के घोसियाना मोहल्ले में एक खंडहरनुमा कोठी पहुंचे. इस दौरान इस अभिनेता ने अपनी पत्नी के साथ अपने बचपन की पुरानी बातों को साझा किया.

नसीरुद्दीन शाह के साथ-साथ उनकी यह जन्मस्थली भी समय के साथ-साथ अब बूढ़ी होकर खंडहरनुमा इमारत बन चुकी है. आज के समय में इस खंडरनुमा इमारत पर एक मेडिकल स्टोर चलाने वाले मोहम्मद युनुस का मालिकाना हक़ है. पचास के दशक में जब यह खंडरनुमा इमारत राजा जहांगीराबाद की आलिशान कोठी हुआ करती थी और राजा जहांगीराबाद की इस आलिशान कोठी में सेना के एक अधिकारी इमामुद्दीन शाह का परिवार रहा करता था. बीस जुलाई उन्नीस सौ पचास को इमामुद्दीन शाह के घर एक बेटा पैदा हुआ, जिसने इसी कोठी के सहन में लड़खड़ा-लड़खड़ा कर चलना सीखा और जब यह बच्चा तीन चार साल का ही था, तभी इमामुद्दीन शाह का तबादला हो गया और उनका परिवार यहां से चला गया.3/ 6

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फिर लगभग छह दशक बाद जब यही नन्हा मुन्ना बच्चा इस कोठी में आया तो वो आलिशान कोठी तो खंडरनुमा इमारत में तब्दील हो कर गुमनामी के अंधेरो में खो चुकी थी लेकिन वह नन्हा मुन्ना बच्चा हिंदी फिल्म जगत का मशहूर अदाकार नसीरुद्दीन शाह बन चुका था. शोहरत की बुलंदियों को छूने के बाद भी नसीरुद्दीन शाह अपनी जन्मस्थली को नहीं भूले और उसे तलाशने की जुस्तुजू करते रहे. एक लम्बे अरसे बाद जब नसीरुद्दीन शाह यहां पहुंचे तो सब कुछ बदल चुका था और वह आलिशान कोठी जहां कभी उनकी किलकारियों से गूंजा करती थीं, अपने बदहाली के दौर से गुज़र रही थी. कोठी का काफी हिस्सा गिर चुका था लेकिन नसीरुद्दीन अपनी जन्मस्थली के बचे हुए हिस्से में ऐसा खोये, जैसे उनके बचपन की यादें निकल कर उनके सामने आ गयी हों. नसीरुद्दीन शाह ने कोठी के एक कमरे की तरफ इशारा किया कि शायद मैं इसी कमरे में पैदा हुआ था और उस कमरे के सामने खड़े होकर फोटो खिंचवाया.4/ 6

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नसीरुद्दीन शाह के आने के साथ ही इस गुमनाम इमारत को एक नई पहचान मिल चुकी है. इस कोठी और नसीरुद्दीन शाह के रिश्ते का पता चलने के बाद इस कोठी के मौजूदा मालिक मोहम्मद युनुस और उनका परिवार भी काफी खुश है. मोहम्मद युनुस ने बताया कि कुछ दिनों पहले उनके पास एक फोन आया और फोन करने वाले ने उनसे कहा कि नसीरुद्दीन शाह साहब आपके मकान में सन उन्नीस सौ पचास में पैदा हुए थे और वो अपनी ज़ाये पैदाइश को देखना चाहते हैं. मोहम्मद युनुस को लगा कि किसी ने मज़ाक किया होगा और बात आई-गई हो गयी लेकिन अचानक एक दिन फोन आया और फोन करने वाले ने खुद को नसीरुद्दीन शाह बताते हुए कहा कि मैं रास्ते में हूं और एक-आध घन्टे में आ रहा हूं. अगर आपको कोई ऐतराज़ न हो तो मैं अपनी पैदाइश की जगह आना चाहता हूं. फिर अचानक वो आ गए.5/ 6

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यूनुस ने आगे कहा कि हम ये सोच रहे थे कि हो सकता है कि कोई गलत मैसेज मिला हो. बहरहाल वो खुद आये और ये हम लोगों की खुशनसीबी है कि इतना बड़ा अदाकार जो हिन्दुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया में आर्ट फिल्मों और कमर्शियल फिल्मों का बेताज बादशाह है, वो हमारे सामने बिल्कुल एक दो फिट की दूरी पर खड़ा था. एक ताज्जुब तो हुआ और आज भी वह एक अजीब सा महसूस होता है. एक ख्वाब सा लगता है. सोचा भी नहीं था कि वो शायद यहां आयेंगे. मोहम्मद यूनुस के लिए यह सब किसी सपने से कम नहीं था.