दूसरे विश्व युद्ध में सैनिकों ने खाई थी ये खास भारतीय चीज, नाम जानकर दंग रह जाएंगे आप

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शकरकंद एक बेहद ही गुणी कंद है. असल में कंद सब्जियों का सीधा जुड़ाव जमीन से होता है, इसलिए इनमें विशेष प्रकार के मिनरल्स भी पाए जाते हैं. शकरकंद को शरीर के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है. यह खाते ही शरीर में एनर्जी भर देती है. इसका सेवन शरीर में प्रतिरोधी क्षमता भी इजाफा करता है. भारत में इसकी खूब खेती होती है और इसे बड़े ही चाव खाया जाता है. विदेशों में तो शककंद से कई प्रकार के आहार भी तैयार किए जाते हैं.

विश्वयुद्ध में सैनिकों की भूख शांत करने में मदद की थी
भारत में शकरकंद को छीलकर उसकी अरबी या आलू की तरह सब्जी बनाई जाती है, लेकिन अधिकतर इसे उबालकर मसाले डालकर खाया जाता है. विदेशों में इसकी बेहद कद्र है. इसे सामान्य तरीके से तो खाया ही जाता है, साथ ही स्वादिष्ट पाई, मार्शमैलो, स्मूदी आदि बनाने में इसका उपयोग किया जाता है. स्टार्च और अल्कोहल बनाने में भी शकरकंद काम आती है. कभी कभी शकरकंद और रतालू को एक जैसा मान लिया जाता है. लेकिन दोनों में कोई निकट संबंध नहीं है. इनका आकार और रंग एक जैसा लगता है, लेकिन शकरकंद नम व मीठी होती है, जबकि रतालू सूखे और फीके होते हैं. इन दोनों का उत्पत्ति स्थल भी अलग-अलग है. फलाहारियों के लिए शकरकंदी शानदार आहार है. कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब युद्ध क्षेत्र में भोजन की कमी पड़ने लगी थी, जब शकरकंद ने भी भोजन के रूप में सैनिकों की भूख शांत की थी.

क्या अमेरिका में सबसे पहले उगाई गई थी?
चूंकि शकरकंद एक कंद-मूल है, इसलिए इसे मानव जाति के लिए ज्ञात सबसे पुराने आहार में से एक माना जाता है. वनस्पति विज्ञानी कहते हैं कि शककंद की उत्पत्ति अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में हजारों वर्ष पूर्व हुई और वहां से यह पूरे विश्व में फैली. भारतीय वनस्पति विज्ञानी सुषमा नैथानी ने शकरकंद का उत्पत्ति स्थल मैक्सिको व मिजो अमेरिकन सेंटर माना है, जिसमें दक्षिण मैक्सिको, ग्वाटेमाला, होंडुरस व कोस्टारिका शामिल हैं.

एक्सपर्ट की कार्बन डेटिंग के अनुसार 1000 ईसा पूर्व शकरकंद के प्रागैतिहासिक अवशेष पाए गए हैं. वैसे कुछ विज्ञानी इसका इतिहास और भी प्राचीन मानते हैं. विश्वकोष ब्रिटेनिका का भी कहना है कि शकरकंद उष्णकटिबंधीय अमेरिका का मूल निवासी है. यह दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका, उष्णकटिबंधीय अमेरिका और कैरिबियन के अलावा प्रशांत महासागर के गर्म द्वीपों, जापान और रूस के कुछ हिस्सों में एक महत्वपूर्ण फसल है. यहीं से इसका विस्तार चीन, जापान, मलेशिया और भारत में हुआ.

विदेशी शोध इसे भारतीय मूल का करार देता है
दूसरी ओर एक शोध का दावा है कि शकरकंद का मूल क्षेत्र भारत और आसपास का इलाका है. खास बात यह है कि शोध भारत का नहीं है. अमेरिका स्थित इंडियाना विश्वविद्यालय के बायोलॉजी विभाग के अनुसार नए शोध से पता चलता है कि शकरकंद की उत्पत्ति हजारों वर्ष पूर्व एशिया में हुई थी. बताया गया है कि विभाग प्रमुख प्रोफेसर डेविड दिल्चर और भारत में उनके सहयोगियों ने पूर्वी भारत के हजारों वर्ष पुरानी पत्तियों के जीवाश्मों की पहचान की. इनमें शकरकंद व अन्य पौधों की जानकारी सामने आई.

इस रिसर्च में प्रोफेसर के भारतीय सहयोगी गौरव श्रीवास्तव व राकेश सी मेहरोत्रा थे. यह यह जीवाश्म मेघालय राज्य में पाए गए थे. विश्वविद्यालय ने शोध को वर्ष 2018 में प्रकाशित किया था. जानकारी के लिए बता दें कि ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शती पूर्व लिखे गए आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में भोजन योग्य तीन प्रकार के कंद की जानकारी दी है. इनके नाम मुंजातक, विदारीकंद व अम्लीकाकंद बताए गए हैं और इनकी तासीर शकरकंद समान ही प्रतीत हो रही है.

डायबिटीज से ग्रस्त लोगों के लिए नुकसानदायक नहीं है
यह प्रागैतिहासिक कंद शरीर के लिए भी बेहद लाभकारी है. यह शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है. विशेष बात यह भी है कि यह शरीर में प्रतिरोधी क्षमता को भी बढ़ाती है. योग गुरु व आयुर्वेदाचार्य श्री बालकृष्ण के अनुसार है. शकरकंद मीठा, थोड़ा ठंडा और गरम, वात और पित्त को कम करने वाला, शक्ति को बढ़ाने वाला, कब्ज से राहत दिलाने वाला होता है. यह पेट के लिए लाभकारी, बलकारक, कुष्ठ रोग में राहत देता है. योगगुरु के अनुसार यह सुनकर आश्चर्य होगा कि शकरकंद मीठा होने के बावजूद डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है.

‘VEGETABLES’ पुस्तक के लेखक व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिश्वजीत चौधरी के अनुसार खाने योग्य 100 ग्राम शकरकंद में नमी 68 ग्राम, कैलेारी 120, कार्बोहाइड्रेट 28 ग्राम, प्रोटीन 1.2 ग्राम, फाइबर 0.8 ग्राम, फास्फोरस 50 मिलीग्राम, सोडियम 9 एमजी, मिनरल्स 1.0 ग्राम, कैल्शियम 20 एमजी, पोटाशियम 393 एमजी के अलावा पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए और सी पाया जाता है. यही पोषक तत्व शकरकंद को मनुष्य के शरीर के लिए जानदार और शानदार बनाते हैं.

मोटापा रोकता है, ज्यादा खाया तो बढ़ सकती है परेशानी
जानी मानी डायटिशियन व न्यूट्रिशियन कंसलटेंट अनीता लांबा के अनुसार शकरकंद दिखने में अजीब हो, लेकिन स्वाद व गुणों में बेहतर है. यह पाचन सिस्टम को दुरुस्त रखती है और गैस को दूर रखती है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, साथ ही मिनरल्स व विटामिन इसके एंटीऑक्सिडेंट में बदलते हैं, जो शरीर में सूजन को दूर करने में मदद करते हैं. यही प्रतिरक्षा प्रणाली बीमारियों का खतरा कम करती है और शरीर को भी स्वस्थ बनाए रखती है. इसमें बीटा-कैरोटीन, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की प्रचुरता गठिया का दर्द कम करती है. यह शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को भी संतुलित रखती है. अगर पर्याप्त मात्रा में उबली शकरकंद खा ली जाए तो यह भूख की इच्छा खत्म कर देगी. इसका लाभ यह रहेगा कि वजन पर कंट्रोल लग जाएगा.
इसमें बीटा-कैरोटीन भी पाया जाता है, जिसे हमारा शरीर विटामिन ए में बदल देता है. यह विटामिन आंखों की रोशनी के लिए महत्वपूर्ण है. यही विटामिन ए श्वसन तंत्र को नॉर्मल बनाए रखता है. शकरकंद का अधिक सेवन नुकसानदायक है. जिन्हें हार्ट की समस्या है, वह इसके सेवन से बचें. इसमें ऑक्सालेट भी पाया जाता है, अगर ज्यादा सेवन किया तो गुर्दे और पित्ताशय की पथरी हो सकती है. सीमित मात्रा में खाने से कोई नुकसान नहीं है.