घट रहा नदियों का जलस्तर, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों की बढ़ती जा रही संख्या

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घाघरा (सरयू) नदी का जलस्तर घटते हुए खतरे के निशान के बराबर आ गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से भी पानी का घटना शुरू हो गया है, लेकिन करनैलगंज की सरयू के साथ ही जिले की अन्य नदियों टेढ़ी और कुआनों के उफान से जलमग्न गांव की संख्या बढ़ती जा रही है। बाढ़ में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 56 घर बह चुके हैं। जिले में 146 राजस्व ग्रामों के 662 गांव बाढ़/अतिवृष्टि से प्रभावित हुए हैं। इनमें 489 नावों के साथ-साथ एसडीआरएफ व पीएसी की एक-एक प्लाटून तथा चार मोटरबोट राहत/बचाव कार्य में लगाये गये हैं। जिले में दो लाख 28 हजार 89 आबादी प्रभावित हुई है। सरयू में इतना सैलाब कहां से आया यह किसी को पता नहीं चल पा रहा है। लगातार धान, सब्जी व गन्ना की फसलें जलमग्न होकर नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

करनैलगंज की सरयू में आए उफान से जलमग्न होने वाले गांव की संख्या होने के साथ ही लहलहाती फसलें बाढ़ के पानी में डूबती नजर आ रही है। इससे किसानों में मायूसी है। सब्जी, धान, गन्ना की फसल खेतों में ही सड़ने लगी है। यहां सरयू का जलस्तर घटने का नाम नहीं ले रहा है बल्कि धीरे-धीरे नदी में उफान बढ़ता जा रहा है। एसडीएम हीरालाल ने बताया कि राहत कार्य हो रहा है। वहीं नवाबगंज में नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट के बाद भी तटवर्ती इलाकों में तबाही का मंजर जस का तस दिखाई पड़ रहा है।

सरयू अभी भी खतरे के निशान से 33 सेमी. ऊपर बह रही है। तटवर्ती इलाके अभी भी पानी से घिरे हुए हैं। लोगों का घरों से संपर्क टूट चुका है। क्षेत्र के दत्तनगर, गोकुला, साखीपुर, तुलसीपुर माझा, माझा राठ, जैतपुर, दुर्गागंज माझा, व्यौंदा माझा, दुल्लापुर, महेशपुर, जफरापुर, कटराभोगचंद इस्माइलपुर, लोलपुर गांव पानी से घिरे हुए हैं। हजारों लोग अपने घरों के छतों पर शरण लिए हैं। सरयू के घटते जलस्तर और चिलचिलाती धूप से गांव में संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ गया।
इसके साथ ही तरबगंज में बाढ़ की त्रासदी टेढ़ी नदी के किनारे बसे गांवों पर भारी पड़ी। बालेश्वरगंज-दुर्जनपुर घाट मार्ग पर गेड़सर और दुर्जनपुर घाट की सीमा पर सड़क पर तेजी से पानी बह रहा है। दूसरी तरफ नवाबगंज से हो रही बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। तरबगंज तहसील के पीछे से बहकर निकली टेढ़ी नदी रामपुर टेंगरहा, गौहानी, दुर्जनपुर घाट, पिपरी, भोपतपुर, खरगूपुर, महंगूपुर होते हुए कटरा तक जाती है। यह अयोध्या पहुंचकर सरयू नदी में मिल जाती है। इस बार टेढ़ी नदी में सरयू का जलस्तर बढ़ने के बाद उल्टी बाढ़ शुरू हुई।

महंगूपुर पिपरी भूपतपुर, दुर्जनपुर घाट तथा गेड़सर ग्राम पंचायत प्रभावित हुआ। परसिया से होकर नदी के पानी ने दुर्जनपुर घाट को पूरी तरह अपने आगोश में ले लिया। अधिकांश घरों में पानी घुस गया। प्राथमिक विद्यालय दुर्जनपुर घाट द्वितीय पूरी तरह पानी में डूब गया। प्रधानमंत्री सड़क पर अब भी घुटने के ऊपर पानी भरा हुआ है। आधा दर्जन से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

बाढ़ में सब बर्बाद हो गया, अब राहत का इंतजार
उमरी बेगमगंज में रविवार को बाढ़ चौकी ऐली परसोली पर राहत किट का इंतजार करते लोग मिले। यहां 750 परिवारों के सापेक्ष प्रशासन द्वारा महज 200 किट पहुंचाई जा सकी है। ऐली परसोली के तुलसीराम यादव ने बताया कि छप्पर के नीचे 20 क्विंटल गेहूं रखा था। इसमें बाढ़ का पानी भर जाने से खराब हो गया। आलम यह रहा कि अचानक आई बाढ़ से लोगों को अपनी गृहस्थी समेटने का मौका भी नहीं मिला। तरबगंज विधायक प्रेम नारायण पांडे ने बाढ़ प्रभावित गांव में पहुंचकर राहत व बचाव के अस्थाई कैंपों का निरीक्षण किया और राहत सामग्री बांटी। नवाबगंज में डीएम डॉ. उज्जवल कुमार ने लगातार दो दिन बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौराकर लोगों का हाल जाना तथा राहत सामग्री बांटी। रविवार के कस्बे के नगर पालिका मैरिज हॉल में पूर्व मंत्री व मनकापुर विस क्षेत्र से विधायक रमापति शास्त्री ने जैतपुर माझा के 229 लोगों को राहत किट बांटी। इस मौके पर तहसीलदार पुष्कर मिश्रा, राजस्व निरीक्षक परशुराम मिश्रा, लेखपाल ओमप्रकाश वर्मा, विधायक प्रतिनिधि वेदप्रकाश दूवे, बाबूलाल शास्त्री रहे।

बाढ़ से प्रभावितों को राहत देने में जुटा प्रशासन
बाढ़ आपदा से प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण और राहत वितरण में प्रशासन जुटा है। डीएम डॉ. उज्जवल कुुमार ने बताया कि जिले में 146 राजस्व ग्रामों के 662 गांव बाढ़/अतिवृष्टि से प्रभावित हुए हैं। इनमें 489 नावों के साथ-साथ एसडीआरएफ व पीएसी की एक-एक प्लाटून तथा चार मोटरबोट राहत/बचाव कार्य में लगाये गये हैं। बताया कि जिले में 2,28,089 आबादी प्रभावित हुई है, जिन्हें तत्काल राहत के रूप में लंच पैकेट की व्यवस्था प्रभावित तहसीलों एवं विकास खंडों में संचालित कम्यूनिटी किचन के माध्यम से की जा रही है। अब तक लगभग 5.69 लाख लंच पैकेट बांटे जा चुके हैं और यह कार्य अभी जारी है। प्रभावित क्षेत्र में शुद्ध पेयजल तथा मेडिकल किट के साथ-साथ संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए साफ सफाई, कीटनाशक दवाओं के छिड़काव सहित फॉगिंग आदि कराई जा रही है।