खतर के निशान से ऊपर बह रही सरयू नदी, 20 गांव बाढ़ के पानी से घिरे

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नेपाल से छोड़े गए पानी व बारिश के चलते सरयू नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी खतरे के निशान से 45 सेमी. ऊपर बह रही है। हर घंटे सरयू के जलस्तर में एक सेमी. की वृद्धि हो रही है। रुदौली व सदर तहसील के लगभग 20 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। गांव में नाव चलने लगी हैं। रुदौली के एक दर्जन गांव के करीब 510 परिवार दुश्वारियों में रहने को मजबूर हैं। अब वह गांव से पलायन की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन भी बाढ़ को लेकर अलर्ट है।

रुदौली के सल्लाहपुर, महंगू का पुरवा, अब्बूपुर, मुजेहना, सराय नासिर गांव में बाढ़ के पानी से संपर्क मार्ग कट गया है। ग्रामीण नाव से आवागमन कर रहे हैं। वहीं यही हाल पूरा बाजार क्षेत्र के दर्जन भर गांव का है। शुजागंज प्रतिनिधि के अनुसार रुदौली तहसील क्षेत्र के एक दर्जन गाँव के 510 परिवार को एक बार फिर नदी के जलस्तर बढ़ने से दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण अब सुरक्षित स्थान पर पलायन करने लगे हैं।

जलस्तर बढ़ने से महंगू का पुरवा के 140 परिवार, कैथी मांझा के लगभग 82, सराय नासिर के 25, कैथी गांव के 15, सल्लाहपुर के 185, अब्बूपुर के 27, मुजेहना के 36 परिवार के लोगों को बाढ़ की दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्रीय जल आयोग अयोध्या की रिपोर्ट के मुताबिक जलस्तर में वृद्धि अभी जारी रहेगी। सोमवार शाम सात बजे सरयू का जलस्तर 93.18 मीटर रिकॉर्ड किया गया जो कि खतरे के निशान 92.73 मीटर से 45 सेमी. अधिक है। वहीं बाढ़ प्रभावित रुदौली के उपजिलाधिकारी स्वप्निल यादव ने बताया कि बाढ़ कि स्थिति पर नजर रखी जा रही। क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक व लेखपाल नदी के जलस्तर बढ़ने पर नजर रख रहे हैं। प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को जल्द मिट्टी का तेल दिलाने के व्यवस्था की जा रही है।
बाढ़ चौकी राजा दशरथ समाधि स्थल पर सोमवार को ताला लगा हुआ था। यहां कोई कर्मचारी न होने पर स्थानीय लेखपाल सौरभ पांडे से बात हुई तो उन्होंने बताया कि अभी बाढ़ से कोई खतरा नहीं है।

हाल यह है कि बाढ़ क्षेत्र में घरों में तेजी से पानी फैल रहा है। मुख्य मार्ग में तेजी से पानी का बहाव हो रहा है। मूडाडीहा के पूर्व प्रधान तेज बहादुर निषाद ने बताया कि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो कल से लोग घरों से सामान लेकर गांव से बाहर निकलना शुरू कर देंगे। रुदौली के बाढ़ प्रभावित गांव कैथी माझा निवासी शिव कुमार ने बताया कि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। यदि इसी प्रकार से जलस्तर बढ़ा तो एक दो दिन में गांव चारों ओर पानी से तरफ से घिर जाएगा।

इसी गांव श्रीदत्त यादव ने बताया कि पांच दिन पहले लेखपाल आए थे। उन्होंने सबके घर जा कर नाम लिखे हैं। वहीं पशु विभाग की टीम ने मवेशियों को टीकाकरण किया है, लेकिन अभी तक स्वास्थ विभाग के डॉक्टर व कर्मी गांव नहीं पहुंचे हैं। कैथी मांझा के ग्रामीण राम शंकर, गौरी शंकर, मौजीराम, वीरेंद्र बहादुर ने बताया कि हमारे गांव में विद्युतीकरण नहीं है। इसके बाद भी हमें मिट्टी का तेल नहीं मिलता है। बारिश व बाढ़ के समय हर समय विषैले जंतुओं का खतरा बना रहता है।

रात जाग कर गुजरनी पड़ती हैं। महंगू का पुरवा निवासी संजय सिंह ने बताया कि दो दिनों से नदी का जलस्तर तेजी के साथ बाढ़ रहा है। अब हम गांव छोड़ सुरक्षित स्थानों पर जाने की सोच रहे हैं। मूडाडीहा के भगौती, लल्लन व पिपरी संग्राम के नंबरदार व त्रिलोकी ने बताया कि गांव की महिलाएं बच्चों के साथ अब सुरक्षित स्थानों पर जाने लगी हैं। प्राथमिक विद्यालय मूडाडिहा के प्रांगण में पानी भर गया है। यहां तैनात शिक्षक अमित सिंह ने बताया कि रास्तों में भी पानी भर जाने के कारण कम बच्चे स्कूल आ रहे हैं। वहीं मूडाडीहा-उरदा हवा-पिपरी संग्राम को जाने वाले मुख्य मार्ग पर पानी भरने के साथ तेजी से बहाव हो रहा है। उसी के बीच से होकर बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने जा रहे है।

खंड शिक्षा अधिकारी पूरा शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मंगलवार से विद्यालय में छोटे बच्चों की छुट्टी कर दी गई है। बड़े बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बैठाकर पढ़ाया जाएगा। पूराबाजार ब्लॉक के किसानों की सैकड़ों बीघा फसल बाढ़ के पानी में समा गई है। पहले बारिश ने किसानों की कमर तोड़ी अब बाढ़ के पानी में फसलें डूब गई हैं। सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से सदर तहसील के मूडडीहा, सलेमपुर, पिपरी संग्राम, धनी का पुरवा, माझा मडना, माझा रामपुर पुवारी गांव में नदी का पानी भर गया है। इसके चलते सैकड़ों बीघा धान की फसल पानी में डूब गई है, साथ ही पशुओं के लिए हरे चारा का संकट उत्पन्न हो गया है।

एडीएम वित्त एवं राजस्व महेंद्र सिंह का कहना है कि तहसील प्रशासन व राजस्वकर्मी आपदा से निपटने के लिए तैयार हैं। बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में आवागमन के लिए नावें लगा दी गई हैं। जानवरों के चारे की भी व्यवस्था कराई जा रही है। राहत सामग्री भी तैयार है। तट बंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।