अमेठी के सूरज कुंड धाम पर मेले का आयोजन, ड्रोन कैमरे से रखी जाएगी निगरानी

My Bharat News - Article सूरजकुंड धाम के पास सफाई करवाते लोग

अमेठी कार्तिक पूर्णिमा के दिन बहादुरपुर ब्लॉक क्षेत्र के सूरज कुंड धाम पर अरसा पूर्व से विशाल मेले का आयोजन होता है। इस दिन यहां पर बड़ी संख्या में आने वाले लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार भी करते हैं। इस मेले में आने वाले दुकानदार कई लाख रुपये का कारोबार करते हैं।

ग्राम पंचायत मवई आलमपुर में सूरज कुंड धाम पर प्राचीन काल से हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन विशाल मेले का आयोजन होता आ रहा है। मेले को लेकर क्षेत्रीय लोगों में उत्साह है। मवई आलमपुर ग्राम पंचायत की ओर से मेला परिसर की साफ सफाई कराई जा रही है तो पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मेला परिसर में सीसीटीवी लगाने के साथ ड्रोन कैमरे से निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है।

मेले के बारे में क्षेत्रीय लोगों की मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण एवं पत्नी सीता के साथ वनवास के समय यहां कुछ समय के लिए रुके तो पवित्र सूरजकुंड सरोवर के जल का प्रयोग किया था। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बच्चों का मुंडन संस्कार कराने व सूरज कुंड में स्नान करने के साथ मेले का आनंद लेते हैं। लेकिन मेले व कुंड का विकास अब तक नहीं हो पाया है। यहां का कुंड बदहाल है। मेले में श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर आते हैं।
क्षेत्रीय लोग कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस मेले में जुटते और आनंद उठाते हैं। इस मेले में सबसे अधिक बिक्री गन्ना की होती है। कई जिलों के व्यापारी ट्रकों और ट्रैक्टरों में गन्ना बेचने आते हैं। लोगों के अुनसार लगभग 30 लाख रुपये का व्यापार सिर्फ गन्ना दुकानदारों का होगा। इलाके के बाबू व रामसीजवन ने बताया कि उन्हें सही-सही तो नहीं पता कि मेला कितना प्राचीन है। लेकिन किवदंती है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन मां गंगा यहां आई थीं। तभी से यह धाम सूरज कुंड के नाम से जाना जाने लगा।
ग्राम प्रधान रामसेवक वर्मा ने बताया कि मेले में साफ सफाई व्यवस्था कराई जा रही है। सभी दुकानदारों को सुविधाओं का विशेष ध्यान रखते हुए मेले में कोई अव्यवस्था नहीं हो इसके लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ग्राम प्रधान ने प्राचीन सूरज कुंड धाम में लोगों की आस्था को देखते हुए पर्यटक स्थल घोषित करने की मांग की है।