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रविवार, अगस्त 1, 2021

अटल जयंती: जानिये अटल बिहारी वाजपेयी के पत्रकार से प्रधानमंत्री बनने का दिलचस्प सफर!

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My Bharat News - Article ATAL JI
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 96वीं जयंती है। 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई थी। भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन सफर भी कम दिलचस्प नहीं था। राजनीतिक विज्ञान से स्नातकोत्तर करने के बाद उन्होंने अपना करियर पत्रकारिता से शुरू करने का निर्णय लिया। दरअसल वे अपने बचपन से ही राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे व उनके इस जुड़ाव से उनके अंदर देशप्रेम और समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठा की भावना जागृत हो गई थी। ऐसे में उन्हें पत्रकारिता की राह ही सही लगी जिससे वो समाज की बेहतरी के लिए कुछ कर पाएं।

My Bharat News - Article JAMMU KASHMIR
जम्मू-कश्मीर में अटल बिहारी वाजपेयी


बतौर पत्रकार अटल बिहारी वाजपेयी अपना पत्रकारिता का कार्य बखूबी कर रहे थे। वहीं, 1947 को मिली देश की आज़ादी के बाद से जम्मू-कश्मीर के हालात साल-दर-साल खराब होते जा रहे थे। तभी 1953 का वो साल आ गया जो अटल बिहारी वाजपेयी का पूरा जीवन बदलने वाला था। 1950 तक आते-आते जम्मू-कश्मीर में परमिट सिस्टम लागू कर दिया गया था जिसके अंतर्गत किसी भी भारतीय को जम्मू-कश्मीर राज्य में बसने की इजाजत नहीं दी जाने की बात थी। भारतीय जनसंघ के नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शुरू से ही कश्मीर को विशेष दर्जा दिए जाने के विरुद्ध थे और इसीलिए अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए उन्होंने 1953 में श्रीनगर जाने का निर्णय लिया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बिना परमिट के वहाँ पहुँचने में सफल भी हो गए। तब वाजपेयी भी उनके साथ इस घटना को कवर करने गए थे। जब परमिट सिस्टम को तोड़ने की वजह से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया तब उन्होंने वाजपेयी से कहा कि तुम जाओ और दुनिया को बताओ कि मैं कश्मीर आ गया हूँ, बिना किसी परमिट के। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नज़रबंद किये जाने के कुछ ही दिन बाद उनकी किसी बीमारी से मौत की खबर सामने आ गई। एक इंटरव्यू में अटल बिहारी वाजपेयी ने बताया था कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की असमय मृत्यु के दुखद समाचार से वे काफी विचलित हो गए थे व तब उन्हें लगा कि डॉ. मुखर्जी के कार्य को उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए और ऐसे वे राजनीति में आ गए। गौरतलब है कि वे 1957 में पहली बार सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे थे। वह भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। सबसे पहले वे 13 दिनों के लिए साल 1996 में प्रधानमंत्री बने, 13 महीनों के लिए साल 1998 -1999 में और फिर 1999 से 2004 तक अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करने में वे सफल रहे।

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